Ranchi: भीषण गर्मी और तपती धूप भी आदिवासी समाज के सदियों पुराने उत्साह को कम नहीं कर सकी है. झारखंड, ओडिशा और बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से पारंपरिक वेशभूषा में सजे सेंदरा वीर दलमा की तराई में डेरा डाल चुके हैं. सोमवार तड़के सूर्योदय के साथ ही दलमा की ऊंची चोटियों पर प्रकृति और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा.
आस्था और शक्ति का आह्वान
सेंदरा पर्व की औपचारिक शुरुआत रविवार को दलमा राजा राकेश हेंब्रम द्वारा फदलोगोड़ा में विशेष पूजा-अर्चना के साथ की गई. ढोल-नगाड़ों की थाप पर वन देवी-देवताओं का आह्वान किया गया और तीर-धनुष, भाला और बरछी जैसे पारंपरिक अस्त्रों का पूजन किया गया. दलमा राजा ने सेंदरा वीरों की सुरक्षा के साथ राज्य में अच्छी बारिश और बेहतर फसल की कामना की. इस अनुष्ठान में मांझी-परगना महाल के प्रमुखों के साथ परगना, नायके और मुंडा भी शामिल हुए.
बदलते समय के साथ बदला स्वरूप
आधुनिकता के प्रभाव से सेंदरा का स्वरूप भी बदल रहा है. अब सेंदरा वीर पैदल के बजाय मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहनों से तराई के गांवों जैसे हलुदबनी और आसनबनी पहुंच रहे हैं. भीषण गर्मी से बचने के लिए लोग पेड़ों की छांव में विश्राम कर रहे हैं, ताकि सोमवार को पूरे उत्साह के साथ जंगल की ओर प्रस्थान कर सकें.
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वन विभाग की निगरानी
सेंदरा पर्व को सुरक्षित और नियमों के अनुरूप संपन्न कराने के लिए वन विभाग भी पूरी तरह सतर्क है. विभाग द्वारा शिकारियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की जानकारी दी जा रही है, ताकि सेंदरा को प्रतीकात्मक रूप में मनाया जा सके और वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचे.
चेक पोस्ट और ड्रोन से नजर
दलमा क्षेत्र के प्रवेश द्वारों पर चेक पोस्ट बनाए गए हैं और वनकर्मियों की टीम लगातार गश्त कर रही है. ड्रोन और कैमरों के माध्यम से पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है. वन अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी परंपरा का पालन करें, लेकिन किसी भी वन्यजीव को नुकसान न पहुंचाएं.
