Ranchi: झारखंड में सक्रिय प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के वित्तीय नेटवर्क और टेरर फंडिंग के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने अब तक की सबसे बड़ी चोट की है. ED के रांची जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत मैसर्स संतोष कंस्ट्रक्शन और उसके सहयोगियों की 3.87 करोड़ की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है. इस कार्रवाई की जद में 15 लाख का इनामी माओवादी रिजनल कमांडर रविंद्र गंझू, संतोष कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार उर्फ सोनू सिंह, मनीष कुमार, बैजनाथ गंझू और राजेश कुमार गंझू शामिल हैं.
नक्सली हमले और 5 लाख लेवी से खुला था राज
ED की यह जांच लातेहार जिले के चंदवा थाने में दर्ज दो प्राथमिकियों के आधार पर शुरू हुई थी, जिसे बाद में NIA ने टेकओवर किया था. पहली प्राथमिकी 22 नवंबर 2019 को लातेहार के लुकइया मोड़ पर NH-75 पर हुए उस भयावह माओवादी हमले से जुड़ी है, जिसमें झारखंड पुलिस के 4 जवान शहीद हो गए थे और उनके हथियार लूट लिए गए थे. वहीं दूसरी प्राथमिकी संतोष कंस्ट्रक्शन के पार्टनर मृत्युंजय कुमार उर्फ सोनू सिंह द्वारा माओवादी कमांडर रविंद्र गंझू को ₹5 लाख की लेवी (जबरन वसूली) का नकद भुगतान करने के दौरान हुई जब्ती से संबंधित है.
ब्लैक मनी को व्हाइट करने का खेल
जांच में खुलासा हुआ है कि उग्रवादी गतिविधियों और लेवी के जरिए कुल 7.16 करोड़ रूपया की काली कमाई अर्जित की गई थी. इसमें से 2.69 करोड़ रूपया नकद NIA ने छापेमारी के दौरान पहले ही बरामद कर लिए थे. बाकी बचे 4.46 करोड़ रूपया को वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 के दौरान पूंजी निवेश के रूप में संतोष कंस्ट्रक्शन फर्म में खपायागया था. बैंकिंग स्क्रूटनी से बचने के लिए कम कीमत पर सेल डीड बनाकर और ऑफ-द-बुक्स कैश पेमेंट का इस्तेमाल कर लातेहार के चंदवा और कामता मौजा में 11 अचल संपत्तियां खरीदी गईं, जिन्हें अब ईडी ने पीएमएलए कानून के तहत जब्त कर लिया है.
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