Ranchi: वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए वित्तीय मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया है. पिछले छह महीनों के दौरान विभाग ने राज्य की विभिन्न महत्वाकांक्षी वानिकी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए 18 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक की राशि निर्गत की है. डिजिटल पारदर्शी प्रणाली के जरिए सीधे जिला वन प्रमंडलों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को राशि निर्गत की गई है, ताकि बिना किसी प्रशासनिक देरी के धरातल पर काम शुरू हो सके. इस वित्तीय आवंटन का मुख्य उद्देश्य अवकृष्ट वनों का पुनरुद्धार, निजी भूमि पर वृक्षारोपण को बढ़ावा देना, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का सुधार और स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना है.
मुख्यमंत्री जन वन योजना: निजी भूमि पर हरियाली और समृद्धि का नया मॉडल
राज्य सरकार ने किसानों और निजी भूमि मालिकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ हरित आवरण के विस्तार के लिए ‘मुख्यमंत्री जन वन योजना’ पर विशेष फोकस किया है. पिछले छह महीनों के भीतर विभाग ने इस योजना के तहत फलदार और काष्ठ (इमारती लकड़ी) प्रजाति के पौधों के रोपण के लिए 11 करोड़ 26 लाख 33 हजार रुपये जारी किए हैं. इस राशि का उपयोग ट्रेंच (खाई निर्माण), झाड़ी घेरान (बाड़ लगाना), पौधों की आपूर्ति और स्थानीय रैयतों को तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए किया जा रहा है. योजना के तहत वैसे व्यक्तियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनके पास राजस्व अभिलेखों के अनुसार वैध स्वामित्व है. इसमें से करीब 5.92 करोड़ रुपये मजदूरी मद में और 5.28 करोड़ रुपये सामग्री आपूर्ति मद में आवंटित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर मानव-दिवसों (रोजगार) का सृजन हुआ है.
अधिसूचित वनभूमि पर वृक्षारोपण और भू-संरक्षण: जनजातीय क्षेत्रों का कायाकल्प
“अधिसूचित वनभूमि पर वृक्षारोपण एवं भू-संरक्षण” योजना के तहत 6 करोड़ 48 लाख 71 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है. यह राशि मुख्य रूप से अवकृष्ट वनों के पुनर्वास और वन भूमि पर पूर्व में किए गए वृक्षारोपण के रख-रखाव के लिए विभिन्न संबंधित वन प्रमंडलों को ऑनलाइन स्थानांतरित की गई है. इस योजना का एक बड़ा हिस्सा प्राथमिक इकाई मजदूरी के रूप में सीधे स्थानीय आदिवासियों और वनवासियों के खातों में जा रहा है, जिससे सुदूरवर्ती क्षेत्रों में आर्थिक मंदी का असर कम हुआ है.
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कैंपा और निवल वर्तमान मूल्य: स्थायी पौधशालाओं का आधुनिकीकरण
विकासात्मक परियोजनाओं के कारण कटी वन भूमि की भरपाई और पर्यावरण क्षतिपूर्ति के लिए कैंपा फंड का व्यापक उपयोग किया जा रहा है. विभाग ने “वन भूमि का निवल वर्तमान मूल्य” योजना के अंतर्गत राज्य के विभिन्न हिस्सों में हाई-टेक और स्थायी पौधशालाओं की स्थापना के लिए विशेष उप-आवंटन आदेश जारी किए हैं. इसके साथ ही ई-ग्रीन वॉच पोर्टल पर किए गए सभी वृक्षारोपण कार्यों की सटीक जियो-कोऑर्डिनेट्स और केएमएल फाइलें अपलोड करने की शर्त अनिवार्य कर दी गई है. राष्ट्रीय प्राधिकरण के नियमों के तहत इन फंडों का एक बड़ा हिस्सा वनों के किनारे बसे गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के साथ समन्वय स्थापित कर खर्च किया जा रहा है.
लघु वन उपज उत्पादन योजना: तसर धागा और तसर सिल्क का संरक्षण
वन विभाग ने इस पारंपरिक आजीविका को नई ताकत देने के लिए “लघु वन उपज उत्पादन योजना” (अन्य व्यय) के तहत विशेष आवंटन जारी किया है. इसके तहत मुख्य रूप से गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल समेत अन्य संबंधित क्षेत्रों को ऑनलाइन उप-आवंटन किया गया है. यह राशि 2000 क्विंटल से अधिक तसर धागे के संरक्षण, सुखाने, सुरक्षित भंडारण और 10 वर्ष की क्षमता वाले ‘प्लांट लेट प्रोसेसिंग यूनिट’ के संचालन के लिए निर्गत की गई है.
वन प्रबंधन सुविधाएं एवं कार्य नियोजन: तकनीक और पारदर्शिता से सुसज्जित वन प्रमंडल
नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही विभाग ने प्रशासनिक कार्यों और क्षेत्रीय स्तर पर कार्य नियोजन को दुरुस्त करने के लिए राशि जारी करनी शुरू कर दी है. इसके तहत “वन प्रबंधन सुविधाएं” योजना (अन्य क्षेत्र उपयोजना) के अंतर्गत राज्य के सभी वन प्रमंडलों को ऑनलाइन बजट आवंटित किया गया है. इस राशि का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर वनों की प्रभावी निगरानी, आग से सुरक्षा और अवैध कटाई एवं शिकार को रोकने के लिए वन प्रमंडलों की ढांचागत सुविधाओं को मजबूत करना है. विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, आवंटित राशि के खर्च में पूरी पारदर्शिता बरतने और समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने के सख्त आदेश दिए गए हैं.



