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ब्रदरहुड हाउस: हजारीबाग की शिक्षा, सेवा और विरासत का मूक प्रहरी

Hazaribagh: शहर के नए बस स्टैंड से मिशन स्कूल और मिशन अस्पताल की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित एक जर्जर लेकिन...

Hazaribagh: शहर के नए बस स्टैंड से मिशन स्कूल और मिशन अस्पताल की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित एक जर्जर लेकिन ऐतिहासिक भवन आज भी बीते गौरवशाली दौर की कहानी सुनाता है. यह है ब्रदरहुड हाउस, जो कभी हजारीबाग में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक उत्थान की गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था. आज भले ही इसकी दीवारें खामोश हैं, लेकिन इन दीवारों में एक पूरे युग की स्मृतियां कैद हैं.

डबलिन यूनिवर्सिटी मिशन के साथ शुरू हुई नई कहानी

उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में आयरलैंड के डबलिन यूनिवर्सिटी मिशन टू छोटानागपुर ने हजारीबाग को अपने कार्यों का केंद्र बनाया. वर्ष 1891 में मिशन की औपचारिक शुरुआत हुई और इसके बाद शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से संस्थागत विकास हुआ. मिशन ने अस्पताल, विद्यालय और कॉलेज स्थापित कर हजारीबाग को पूर्वी भारत के एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र के रूप में पहचान दिलाई. इसी मिशन के प्रयासों से आगे चलकर संत कोलम्बा स्कूल, संत कोलम्बा कॉलेज, मिशन अस्पताल, एलिजाबेथ गर्ल्स स्कूल तथा चर्च जैसे संस्थानों का विकास हुआ. इन संस्थानों ने न केवल हजारीबाग बल्कि पूरे छोटानागपुर क्षेत्र की शैक्षणिक तस्वीर बदल दी.

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जब हजारीबाग बन गया था शिक्षा की राजधानी

ब्रिटिश काल में हजारीबाग की पहचान केवल एक पहाड़ी और स्वास्थ्यप्रद नगर के रूप में नहीं थी, बल्कि इसे शिक्षा और बौद्धिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में भी जाना जाता था. देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी यहां पढ़ने आते थे. शिक्षकों, मिशनरियों, चिकित्सकों और समाजसेवियों का लगातार आगमन हो रहा था. मिशन के विस्तार के साथ एक बड़ी चुनौती सामने आई- इन सभी लोगों के रहने की व्यवस्था. इसी आवश्यकता ने एक ऐसे भवन की नींव रखी, जो आगे चलकर मिशनरी गतिविधियों का केंद्र बन गया.

1896 में बना था ब्रदरहुड हाउस

वर्ष 1896 में मिशन परिसर के भीतर ब्रदरहुड हाउस का निर्माण कराया गया. इसका उद्देश्य मिशन से जुड़े शिक्षकों, प्रोफेसरों, चिकित्सकों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों को आवास उपलब्ध कराना था. लेकिन ब्रदरहुड हाउस केवल एक आवासीय भवन नहीं था. यहां रहने वाले लोग शिक्षा के प्रसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सामाजिक जागरूकता के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते थे. यह भवन वास्तव में सेवा, अनुशासन और समाज निर्माण की एक जीवंत कार्यशाला था.

सेवा और समर्पण का केंद्र

डबलिन मिशन के सदस्य सामूहिक जीवन शैली अपनाते थे. वे नियमित अध्ययन, प्रार्थना, शिक्षण और सामाजिक कार्यों में लगे रहते थे. मिशन अस्पताल, विद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली सेवा गतिविधियों की योजनाएं भी यहीं से संचालित होती थीं. कहा जाता है कि उस दौर में ब्रदरहुड हाउस का वातावरण ज्ञान, सेवा और मानवीय मूल्यों से ओतप्रोत रहता था. यहां रहने वाले लोग केवल नौकरी नहीं करते थे, बल्कि समाज को बेहतर बनाने का मिशन लेकर काम करते थे.

एएफ मार्कहम से भी जुड़ा है इतिहास

स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, इस परिसर का संबंध ए. एफ. मार्कहम से भी रहा है, जिन्हें हजारीबाग के प्रसिद्ध मार्खम कॉलेज की स्थापना से जोड़ा जाता है. बताया जाता है कि ब्रदरहुड हाउस परिसर में उनके द्वारा स्थापित एक पुस्तकालय भी संचालित होता था, जिसके कुछ अवशेष आज भी अतीत की कहानी कहते दिखाई देते हैं.

हजारीबाग की पहचान गढ़ने में रही महत्वपूर्ण भूमिका

बीसवीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में हजारीबाग को शिक्षा और सामाजिक जागरण के केंद्र के रूप में स्थापित करने में मिशनरी संस्थानों की बड़ी भूमिका रही. मिशन अस्पताल ने स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया, जबकि विद्यालयों और कॉलेजों ने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की. 1911 के ब्रिटानिका अभिलेखों में भी उल्लेख मिलता है कि हजारीबाग में डबलिन यूनिवर्सिटी मिशन द्वारा संचालित कॉलेज उस समय क्षेत्र की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं में शामिल था.

आज खंडहर, लेकिन इतिहास अब भी जीवित

समय के साथ मिशनरी गतिविधियों का स्वरूप बदला और ब्रदरहुड हाउस का उपयोग कम होता गया. आज यह भवन जर्जर अवस्था में खड़ा है. इसकी टूटी दीवारें, पुरानी खिड़कियां और वीरान परिसर बीते गौरव की याद दिलाते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस भवन के संरक्षण की पहल नहीं की गई, तो हजारीबाग अपनी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर खो सकता है.

संरक्षण की जरूरत

ब्रदरहुड हाउस केवल ईंट-पत्थरों से बनी एक इमारत नहीं है. यह उस दौर का प्रतीक है जब शिक्षा, सेवा और समाज सुधार को राष्ट्र निर्माण का आधार माना जाता था. यह भवन हजारीबाग के उस स्वर्णिम अध्याय का साक्षी है, जिसने इस शहर को देशभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई. इतिहासकारों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन को मिलकर इस धरोहर के संरक्षण की दिशा में गंभीर पहल करनी चाहिए. यदि इसे संरक्षित कर एक हेरिटेज सेंटर या शैक्षणिक संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाए, तो यह आने वाली पीढ़ियों को हजारीबाग के गौरवशाली अतीत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है.

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