धर्म डेस्क: वैदिक पंचांग के अनुसार गंगा सप्तमी का पर्व हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. हालांकि, यदि किसी कारणवश इस पावन अवसर पर गंगा तट तक पहुंचकर स्नान करना संभव न हो, तो भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है. शास्त्रों में बताए गए कुछ सरल नियमों और विधियों का पालन करके घर पर ही मां गंगा का स्मरण कर उनके आशीर्वाद और स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त किया जा सकता है.
इस मुहूर्त में करें पवित्र स्नान का संकल्प
यदि आप गंगा सप्तमी के दिन गंगा तट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो घर पर ही ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से भी गंगा स्नान के समान पुण्य प्राप्त किया जा सकता है. इसके लिए स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाना शुभ माना जाता है. स्नान करते समय मां गंगा का ध्यान करें और “हर-हर गंगे” का उच्चारण करें. इसके साथ ही इस पवित्र मंत्र का जाप भी किया जा सकता है – “गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति, नर्मदे सिंधु कावेरी जलेस्मिन् सन्निधिं कुरु”.
गंगा सप्तमी के शुभ मुहूर्त
- गंगा सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय प्रातः 4 बजकर 20 मिनट से लेकर प्रातः 5 बजकर 4 मिनट तक रहेगा.
- इसके साथ ही इस दिन मध्याह्न मुहूर्त में पूजा-पाठ, स्नान और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. यह मध्याह्न मुहूर्त प्रातः 11 बजकर 1 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.
घर पर कैसे करें गंगा सप्तमी की पूजा?
- घर के पूजा स्थल पर मां गंगा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें.
- श्रद्धापूर्वक फल, फूल और मिठाई का भोग अर्पित करें.
- इस दिन ‘गंगा चालीसा’ का पाठ करना शुभ माना जाता है.
- शुद्ध घी का दीपक जलाकर मां गंगा की आरती करें.
- संध्या समय घर के मंदिर, तुलसी के पौधे या किसी पवित्र स्थान पर दीपदान करें.
मां गंगा के मंत्र
गंगा सप्तमी के दिन पूजा के दौरान मां गंगा का ध्यान करते हुए इन पवित्र मंत्रों का श्रद्धापूर्वक उच्चारण किया जा सकता है—
- ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः।
- गंगा पापं शशी तापं दैन्यं कल्पतरुस्तथा।
- पापं तापं च दैन्यं च हन्ति सज्जनसङ्गमः।।
इन कार्यों से भी मिलते हैं शुभ फल
- मान्यता है कि मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से होकर पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, इसलिए गंगा सप्तमी के दिन शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है.
- इस दिन किया गया दान विशेष फल देता है और साधक को ‘पापमोचनी’ की कृपा प्राप्त होती है.
- अपनी क्षमता अनुसार गरीबों व जरूरतमंदों को अन्न, धन तथा विशेष रूप से सफेद वस्त्रों का दान करना शुभ माना जाता है.
- पितरों की शांति के लिए गुड़ और तिल का दान करना भी इस दिन अत्यंत फलदायी माना गया है.
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी पर आधारित है. इसमें दी गई बातों की पुष्टि दैनिक जागरण नहीं करता. जानकारी विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, पंचांग और मान्यताओं से ली गई है. पाठक इसे अंतिम सत्य न मानें और अपने विवेक से निर्णय लें.
