Ranchi: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित न हो पाने पर विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया है. मरांडी ने इसे संसदीय इतिहास के लिए एक काला अध्याय करार देते हुए कहा कि यह केवल एक बिल का गिरना नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के भरोसे का कत्ल है.
महिलाओं की उम्मीदों पर चोट
बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि देश की करोड़ों महिलाएं राजनीति और नीति-निर्माण में अपनी 33% भागीदारी के लिए दशकों से संघर्ष कर रही थीं. जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सपना हकीकत बनने के करीब था, तब विपक्षी दलों ने अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों के कारण इसमें बाधा उत्पन्न कर दी. यह विश्वास का टूटना है जिसे देश की महिलाओं ने एक बेहतर और समान भागीदारी वाले भविष्य के लिए संजोया था.
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विपक्ष पर सीधा हमला
मरांडी ने सीधे तौर पर कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और सपा पर हमला बोलते हुए कहा कि इन दलों द्वारा विधेयक का विरोध करना और इसकी असफलता पर जश्न मनाना इनकी प्रतिगामी और महिला विरोधी सोच को उजागर करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि ये दल कभी नहीं चाहते कि महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आएं.
