Hazaribagh: लखनऊ में हुए दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद पूरे देश में शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है. इस घटना ने हजारीबाग जैसे तेजी से विकसित हो रहे शिक्षा केंद्रों की सुरक्षा तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हजारीबाग में पिछले कुछ वर्षों में कोचिंग संस्थानों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है. शहर के विभिन्न इलाकों में सैकड़ों कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, जहां हजारों छात्र-छात्राएं प्रतिदिन पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में आगजनी या किसी अन्य आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था को लेकर चिंता जताई जा रही है.
क्या कोचिंग संस्थान सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं?
शहर के कई कोचिंग सेंटर बहुमंजिला भवनों में संचालित हो रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सभी संस्थानों में आपातकालीन निकास द्वार उपलब्ध हैं? क्या अग्निशमन यंत्रों की नियमित जांच और रखरखाव किया जाता है? क्या भवनों में निर्धारित क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाया नहीं जा रहा है? स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि सुरक्षा संबंधी मानकों की नियमित जांच बेहद जरूरी है, क्योंकि किसी भी आपदा की स्थिति में सबसे अधिक जोखिम छात्रों को उठाना पड़ सकता है.

फायर सेफ्टी ऑडिट की मांग
लखनऊ की घटना के बाद अब हजारीबाग में भी सभी कोचिंग संस्थानों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग उठने लगी है. लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन को कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था, भवन क्षमता, आपातकालीन निकासी मार्ग, अग्निशमन उपकरणों की स्थिति और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच करानी चाहिए. अभिभावकों का मानना है कि जिस भवन में बच्चे अपना भविष्य संवारने के लिए जाते हैं, वहां उनकी सुरक्षा की भी पूरी गारंटी होनी चाहिए.
प्रशासन से सीधे सवाल
शहर में चर्चा का विषय यह भी है कि क्या हजारीबाग के सभी कोचिंग संस्थानों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा? क्या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई होगी? और क्या भविष्य में ऐसी किसी भी दुर्घटना को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
सुरक्षा पहले, संवेदना बाद में नहीं
लोगो का कहना है कि हादसे कभी पूर्व सूचना देकर नहीं आते. अक्सर बड़ी दुर्घटनाओं के बाद जांच और कार्रवाई की बातें होती हैं, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है. ऐसे में जरूरत है कि संभावित खतरों की पहचान कर समय रहते सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं. लखनऊ की घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि सुरक्षा कोई सुविधा नहीं, बल्कि प्रत्येक छात्र का अधिकार है. अब देखना होगा कि हजारीबाग में जिम्मेदार विभाग और प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं.
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