SAURAV SINGH
Ranchi : झारखंड की विधि-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार किया है. राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण न लगा पाने के कारण एक साथ दो जिलों के एसएसपी और एसपी रैंक के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर गाज गिरी है. मुख्यमंत्री ने मंगलवार देर रात जमशेदपुर के एसएसपी पीयूष पांडेय और सरायकेला के एसपी निधि द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया है. दोनों अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय से संबद्ध (अटैच) कर दिया गया है. इस अभूतपूर्व कार्रवाई के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे को एक बेहद स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया हैं. उन्होंने साफ कर दिया है कि जनता की सुरक्षा के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

नौ साल पहले भी सरायकेला जिले में छह महीने के अंतराल पर हटाए गए थे दो डीसी और एसपी:
यह पहली बार नहीं है, जब सरायकेला जिला प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में रहा हो. आज से करीब नौ साल पहले भी सरायकेला-खरसावां जिले में महज छह महीने के अंतराल के भीतर दो बार डीसी और एसपी की जोड़ी को हटाया गया था और एक डीसी और एसपी निलंबित किया गया था. आइए जानते हैं उन दो बड़े मामलों के बारे में.

खरसावां शहीद पार्क में सीएम की सुरक्षा में हुई थी चूक हटाए गए थे डीसी और एसपी:
एक जनवरी 2017 खरसावां शहीद पार्क में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की सुरक्षा में गंभीर चूक हुई थी. तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, गृह सचिव एसकेजी रहाटे और डीजीपी डीके पांडेय की जांच रिपोर्ट के आधार पर सरायकेला-खरसावां के डीसी के. श्रीनिवासन और एसपी संजीव कुमार को तत्काल प्रभाव से हटाकर मुख्यालय भेज दिया गया था. खास बात यह थी कि 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी संजीव कुमार ने छह दिसंबर 2016 को ही जिले के एसपी का पदभार संभाला था, लेकिन इस सुरक्षा चूक के कारण उन्हें महज 26 दिन के भीतर ही पद से हाथ धोना पड़ा था.
बच्चा चोर गिरोह की अफवाह और चार लोगों की हत्या, डीसी और एसपी हुए थे निलंबित:
सरायकेला के राजनगर थाना क्षेत्र में बच्चा चोर गिरोह की अफवाह फैलने के बाद उग्र भीड़ ने बीते 19 मई 2017 को अल्पसंख्यक समुदाय के चार लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. घटना के वक्त स्थानीय लोग लगातार डीसी और एसपी को फोन कर मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन दोनों अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे. जब भीड़ वारदात को अंजाम दे चुकी थी, तब ये अधिकारी करीब छह घंटे की देरी से घटना स्थल पर पहुंचे. इसके अलावा, प्रशासन द्वारा पहले से दिए गए सतर्कता के आदेशों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कोल्हान के आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार और तत्कालीन डीआईजी की जांच रिपोर्ट (जिसमें कर्तव्यहीनता के आरोप प्रमाणित हुए थे) के आधार पर नौ जून 2017 को डीसी रमेश सी. घोलप और एसपी राकेश बंसल को निलंबित कर मुख्यालय अटैच कर दिया था. उस वक्त डीडीसी आकांक्षा रंजन को डीसी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था.

अधिकारियों के लिए ‘वेक-अप कॉल:
सीएम हेमंत सोरेन के द्वारा मंगलवार देर रात की गई कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि झारखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार कोई समझौता करने के मूड में नहीं है. एक साथ दो जिलों के कप्तानों (एसएसपी और एसपी) को हटाना राज्य के बाकी अधिकारियों के लिए एक बड़ा ‘वेक-अप कॉल’ है कि वे फील्ड पर मुस्तैद रहें, अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें.


