Report: Yogesh Kumar

Jamtara: जामताड़ा नगर पंचायत की कार्यशैली, जनहित योजनाओं और कथित अनियमितताओं को लेकर सोमवार को पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र मंडल ने गांधी मैदान, जामताड़ा के समीप प्रेस वार्ता आयोजित कर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि नगर पंचायत में वर्तमान समय में कई कार्य नियम संगत एवं संवैधानिक प्रक्रिया के विरुद्ध किए जा रहे हैं, जबकि जनता से जुड़े मूल मुद्दों की लगातार अनदेखी हो रही है.
बस स्टैंड के पुन: उद्घाटन पर किया सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र मंडल ने वार्ड संख्या 16 अंतर्गत मिहिजाम रोड स्थित आधुनिक बस स्टैंड का मुद्दा उठाते हुए कहा, कि उक्त योजना का लगभग तीन वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा ऑनलाइन शिलान्यास किया जा चुका था, लेकिन अब पुनः मनमाने तरीके से उद्घाटन किया जाना कई सवाल खड़े करता है. उन्होंने स्वामी विवेकानंद बाल उद्यान की बदहाल स्थिति पर भी चिंता जताई. कहा कि उनके कार्यकाल में इस योजना की स्वीकृति दी गई थी और चुनाव के बाद वर्तमान अध्यक्ष द्वारा बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन आज भी वहां घास और झाड़ियां उगी हुई हैं तथा योजना अधूरी दिखाई देती है.
उन्होंने सफाई मजदूरों को ₹30,000 मानदेय देने, प्रत्येक वार्ड में लाइब्रेरी एवं एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध कराने तथा बेरोजगार युवाओं को रोजगार एवं कोचिंग सुविधा देने जैसे चुनावी वादों का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक इन पर कोई ठोस पहल नहीं हुई है.
तीन बोर्ड बैठकें नियम विरुद्ध आयोजित
वीरेंद्र मंडल ने आरोप लगाया कि वर्तमान कार्यकाल में तीन बोर्ड बैठकें नियम विरुद्ध आयोजित की गईं, जिसका वार्ड पार्षदों ने बहिष्कार किया. उन्होंने कहा कि इन बैठकों में नगर हित से जुड़ा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया और इसका दुष्परिणाम दैनिक कर्मियों को हटाने की कोशिश के रूप में सामने आया. उन्होंने दावा किया कि अपने कार्यकाल में उन्होंने दर्जनों बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया था तथा 12 सफाई मित्रों की संख्या बढ़ाकर 80 तक पहुंचाई थी. वहीं, वर्तमान व्यवस्था पर आरोप लगाते हुए कहा कि बस स्टैंड, शौचालय एवं अन्य रोजगार से जुड़े कर्मियों को हटाया गया तथा बस स्टैंड की बंदोबस्ती नियम विरुद्ध निजी लोगों को दी गई.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पॉसोई मोड़ में बाइपास से गुजरने वाली बसों से अवैध उगाही की जा रही थी, जिसे जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद बंद कराया गया. साथ ही नगर के हटिया एवं दुकानों से भी कथित रूप से गलत तरीके से वसूली किए जाने का आरोप लगाया. अंत में उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि जामताड़ा की जनता के अधिकार, विकास और जनहित की लड़ाई है. उन्होंने नगर पंचायत में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की.
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