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प्रलोभन से दस्ते तक… 16 साल की नक्सली प्रेम कहानी का अंत, मीना-सागर पहुंचे सलाखों के पीछे

Seraikela-Kharsawan: केंद्र और राज्य सरकार के लगातार अभियान के बीच नक्सल संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है. सरायकेला-खरसावां जिले में...

Saraikela Kharsawan

Seraikela-Kharsawan: केंद्र और राज्य सरकार के लगातार अभियान के बीच नक्सल संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है. सरायकेला-खरसावां जिले में सुरक्षा बलों के संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान दो हार्डकोर नक्सलियों को हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया है. खास बात यह है कि गिरफ्तार दोनों नक्सली सिर्फ संगठन के साथी नहीं थे, बल्कि पिछले 16 वर्षों से पति-पत्नी के रूप में साथ रह रहे थे. जंगल में शुरू हुई यह कहानी अब जेल की सलाखों तक पहुंच गई है.

दलमा की तराई में ऑपरेशन, हथियार के साथ दबोचे गए दोनों नक्सली

5 अगस्त को नीमडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी की तराई इलाके में सुरक्षा बलों ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाया था. इसी दौरान दो हार्डकोर नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार नक्सलियों की पहचान पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की रहने वाली मीना पहाड़िया और सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह थाना क्षेत्र निवासी सागर सिंह सरदार के रूप में हुई है. सुरक्षा एजेंसियां दोनों से पूछताछ कर रही हैं और संगठन से जुड़े कई मामलों की जानकारी जुटाने में लगी हैं.

11 साल की उम्र में नक्सल संगठन से जुड़ी थी मीना

मीना पहाड़िया पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बलरामपुर थाना क्षेत्र के बढ़कोचा टोला, आमकोचा गांव की रहने वाली है. परिजनों के अनुसार, वह महज 11 साल की उम्र में ही अयोध्या पहाड़ क्षेत्र के नक्सली संगठन के संपर्क में आ गई थी. परिवार का आरोप है कि नक्सलियों ने उसे परिवार को सरकारी नौकरी दिलाने और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर संगठन में शामिल किया था. पिता की मृत्यु के बाद उसकी मां जंगल से लकड़ी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करती थीं. मीना की बड़ी बहन का कहना है कि बहन जब एक बार घर से गई तो फिर वापस नहीं लौटी. वर्षों बाद जब वह सामने आई तो उसे पहचानना भी मुश्किल हो गया.

आज भी बदहाल जिंदगी जी रहा मीना का परिवार

मीना का परिवार आज भी मिट्टी की दीवार और टीन के छप्पर वाले घर में रहने को मजबूर है. ग्रामीणों के अनुसार, पीने के पानी के लिए जंगल के झरने पर निर्भर रहना पड़ता है. सरकारी सुविधाओं की स्थिति भी बेहतर नहीं है. गांव में लगाया गया सोलर पंप खराब पड़ा है. बारिश के दिनों में सांप-बिच्छू का खतरा बना रहता है. वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को कई किलोमीटर दूर अस्पताल ले जाने में परेशानी होती है.

12 साल की उम्र में संगठन से जुड़ा था सागर

दूसरा गिरफ्तार नक्सली सागर सिंह सरदार सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह थाना क्षेत्र के बेनाडीह टोला का रहने वाला है. परिजनों के अनुसार, वर्ष 2008 में महज 12 साल की उम्र में सागर दलमा क्षेत्र के नक्सली एरिया कमांडर स्व. महावीर खड़िया के संपर्क में आया और संगठन से जुड़ गया. सागर का परिवार भी आज खेती और जंगल पर निर्भर है. परिवार के पास भी कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव है.

संगठन में हुई मुलाकात, वहीं हुआ प्यार और शादी

सूत्रों के अनुसार, मीना और सागर की मुलाकात नक्सली संगठन के अंदर ही हुई थी. दोनों के बीच प्रेम संबंध बने और बाद में उन्होंने संगठन के भीतर ही शादी कर ली. करीब 16 वर्षों तक दोनों नक्सली दस्ते के साथ जुड़े रहे और जंगलों में सक्रिय रहे. परिवार वालों को बाद में जानकारी मिली कि दोनों साथ रह रहे हैं और उन्होंने शादी कर ली है.

नक्सली वादों पर उठे सवाल

मीना और सागर की कहानी ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित इलाकों में युवाओं को दिए जाने वाले कथित प्रलोभनों और वादों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.जिन सपनों के साथ युवाओं को संगठन में शामिल किया जाता है, उनके परिवार आज भी गरीबी, बेरोजगारी और मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं.अयोध्या पहाड़ और दलमा क्षेत्र के कई सीमांत गांवों में आज भी सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं की चुनौती बनी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाकर नक्सली संगठन युवाओं को अपने जाल में फंसाते रहे हैं. फिलहाल मीना पहाड़िया और सागर सिंह सरदार पुलिस हिरासत में हैं. सुरक्षा एजेंसियां दोनों से पूछताछ कर संगठन की गतिविधियों और नेटवर्क से जुड़ी जानकारी जुटा रही हैं.

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