Hazaribagh: कटकमदाग प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित जनता दरबार में उस वक्त एक बेहद अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला वाकया सामने आया, जब एक परेशान बुजुर्ग फरियादी ने अपनी जमीन के विवाद को लेकर सीधे टावर पर चढ़ने की चेतावनी दे डाली. पंचायत नवादा टोला (बन्हा) के रहने वाले बुजुर्ग जगदीश राम ने स्थानीय प्रशासन और अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वे पिछले पांच वर्षों से अपनी तीन फीट जमीन के अतिक्रमण को हटवाने के लिए सरकारी दफ्तरों की खाक छान रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला है.
पांच साल का इंतजार और पड़ोसी पर जमीन कब्जाने का आरोप
जनता दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुंचे जगदीश राम ने बताया कि उनके पड़ोसी ने उनकी तीन फीट जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है. इस छोटे से भूखंड के विवाद को सुलझाने और अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए वे लगातार पांच साल से संबंधित अंचल और प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं. हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं होती. थक-हारकर वे अंतिम उम्मीद के साथ स्थानीय विधायक प्रदीप प्रसाद के जनता दरबार में अपनी गुहार लगाने पहुंचे थे.

“न्याय नहीं मिला तो जाम करेंगे रोड या चढ़ेंगे टावर पर”
मीडिया से बातचीत के दौरान जब फरियादी जगदीश राम से उनके अगले कदम के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही बेबाक अंदाज में कहा कि वे आखिरी बार यहां गुहार लगाने आए हैं. अगर इस बार भी उन्हें न्याय नहीं मिलता है, तो वे या तो सड़क जाम करेंगे, मामले को सीधे मुख्यमंत्री के संज्ञान में देंगे या फिर प्रखंड परिसर में स्थित मोबाइल टावर पर चढ़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे. जब उनसे पत्रकार ने अचरज से पूछा कि “टावर पर काहे चढ़िएगा? यह सब कहाँ से सीखे हैं?” तो बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए व्यवस्था पर एक बड़ा ही तीखा और मजेदार तंज कसा. उन्होंने कहा- “टावर पर इसलिए चढ़ेंगे ताकि प्रशासन जल्दी से हमारा अतिक्रमण हटा दें. कुछ दिन पहले जब यहां लोगों का म्यूटेशन नहीं हो रहा था, तो हमारे बगल के एक व्यक्ति टावर पर चढ़ गए थे. उस दिन मैं यहीं मौजूद था और टावर पर चढ़ने के बाद उनका काम तुरंत हो गया था. जब सीधा उंगली से घी नहीं निकल रहा और मेरा काम नहीं हो रहा है, तो मैं क्या करूँगा भैया?”
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अंचल कार्यालयों की सुस्त कार्यशैली पर खड़े हुए सवाल
बुजुर्ग फरियादी की यह बात भले ही सुनने में अजीब लगे, लेकिन यह हजारीबाग के अंचल कार्यालयों की सुस्त और लचर कार्यशैली का एक कड़वा सच उजागर करती है. यह बयान साफ तौर पर दिखाता है कि जब आम जनता नियम-कानून के दायरे में रहकर थक जाती है, तब वह अपनी आवाज सुनाने के लिए ऐसे आत्मघाती और अनोखे रास्ते चुनने को मजबूर होती है. अब देखना यह है कि इस जनता दरबार के बाद क्या पीड़ित बुजुर्ग जगदीश राम को पांच साल से अटका न्याय मिल पाता है या फिर उन्हें अपनी जमीन के लिए सचमुच टावर का सहारा लेना पड़ेगा.


