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जामताड़ा का शातिर साइबर ठग मनोज मंडल को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत, मिली जमानत

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट से जामताड़ा के साइबर अपराध के आरोपी मनोज मंडल को जमानत मिल गई है. न्यायाधीश अनुभा रावत चौधरी की...

Jharkhand High Court grants bail to notorious cyber fraudster Manoj Mandal of Jamtara

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट से जामताड़ा के साइबर अपराध के आरोपी मनोज मंडल को जमानत मिल गई है. न्यायाधीश अनुभा रावत चौधरी की एकल पीठ ने जामताड़ा साइबर अपराध थाना कांड संख्या 54/2025 के आरोपी मनोज मंडल की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है. इससे पूर्व, जामताड़ा की निचली अदालत ने आरोपी के आपराधिक इतिहास और गंभीर साक्ष्यों को देखते हुए उसकी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था. पूरा मामला जामताड़ा साइबर अपराध थाना में दर्ज प्राथमिकी संख्या 54/2025 से संबंधित है. अगस्त 2025 में पुलिसिया कार्रवाई के बाद आरोपी मनोज मंडल को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था. जेल जाने के बाद आरोपी की ओर से जामताड़ा जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत के लिए गुहार लगाई थी. हालांकि, कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जमानत देने से साफ इनकार कर दिया था. इसके बाद आरोपी ने राहत के लिए झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था.

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क्या था पुलिसिया कार्रवाई और गिरफ्तारी का मामला?

अगस्त 2025 में जामताड़ा के साइबर डीएसपी देवेंद्र कुमार वर्मा के निर्देश पर पुलिस की एक विशेष टीम ने नारायणपुर थाना क्षेत्र के कसियाटांड़ स्कूल के समीप छापेमारी की थी. इस छापेमारी के दौरान कसियाटांड़ निवासी मनोज मंडल को पुलिस ने रंगे हाथों साइबर अपराध को अंजाम देते हुए गिरफ्तार किया था. मनोज मंडल के पास से 3 मोबाइल फोन, 9 फर्जी सिम कार्ड (जो दूसरों के नाम पर रजिस्टर्ड थे), 5 एटीएम कार्ड, 3 बैंक पासबुक, 1 पैन कार्ड और 1 आधार कार्ड बरामद किए गए थे.

‘स्क्रीन शेयरिंग ऐप’ के जरिए ठगी का था आरोप

पुलिस चार्जशीट और एफआईआर के तथ्यों के अनुसार, मनोज मंडल पर देश भर के भोले-भाले लोगों को निशाना बनाने का आरोप था. उसका मुख्य हथकंडा (Modus Operandi) लोगों को कॉल करके यह डराना था कि उनका HDFC बैंक या अन्य प्रतिष्ठित बैंकों का क्रेडिट/डेबिट कार्ड ब्लॉक होने वाला है. कार्ड को चालू रखने के वेरिफिकेशन के नाम पर वह पीड़ितों से उनके मोबाइल में ‘स्क्रीन शेयरिंग ऐप’ (Screen Sharing App) डाउनलोड करवा लेता था. इस ऐप के माध्यम से वह पीड़ितों के बैंक खातों की बेहद गोपनीय जानकारी और ओटीपी (OTP) को लाइव देखकर उनके खातों से अवैध रूप से राशि उड़ा लेता था.

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