हजारीबाग: निजी स्कूलों की मनमानी पर विधायक प्रदीप प्रसाद सख्त,कमीशनखोरी और री-एडमिशन शुल्क पर जांच की मांग

Hazaribagh: जिले के निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर थोपे जा रहे अनावश्यक आर्थिक बोझ और स्कूलों की मनमानी के खिलाफ हजारीबाग सदर...

Hazaribagh: जिले के निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर थोपे जा रहे अनावश्यक आर्थिक बोझ और स्कूलों की मनमानी के खिलाफ हजारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने कड़ा रुख अपनाया है. विधायक ने इस गंभीर विषय पर हजारीबाग उपायुक्त को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है.

कमीशनखोरी और साठगांठ का आरोप

विधायक प्रदीप प्रसाद ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि पूरे हजारीबाग जिले में विभिन्न निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर यह दबाव बनाया जाता है कि वे बच्चों की किताबें, जूते और स्कूल ड्रेस किसी एक ‘विशेष दुकान’ से ही खरीदें.

विधायक ने सीधा आरोप लगाया है कि स्कूल प्रबंधन और चुनिंदा दुकानदारों के बीच साठगांठ है, जिसके माध्यम से मोटी कमीशनखोरी की जा रही है. इसी वजह से दुकानों पर इन सामानों की कीमतें मनमाने ढंग से वसूली जा रही हैं, जो आम अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रहा है.

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री-एडमिशन शुल्क पर सवाल

पत्र में विधायक ने स्कूलों द्वारा ‘री-एडमिशन’ के नाम पर ली जाने वाली अवैध राशि का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया है. उन्होंने मांग की है कि री-एडमिशन के नाम पर होने वाली इस वसूली को तत्काल बंद किया जाए.

विधायक की प्रमुख मांगें

विधायक प्रदीप प्रसाद ने मांग की है कि इस पूरे मामले की अविलंब उच्च स्तरीय जांच कराई जाए. सभी निजी स्कूलों को निर्देशित किया जाए कि वे किसी भी सामग्री के लिए किसी विशेष दुकान को अनिवार्य न करें. अभिभावकों को अपनी सुविधा और आर्थिक स्थिति के अनुसार किसी भी दुकान से सामान खरीदने की स्वतंत्रता दी जाए. साथ ही दोषी स्कूल प्रबंधन पर जल्द से जल्द कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.

अभिभावकों में राहत की उम्मीद

विधायक प्रदीप प्रसाद के इस कदम से उन हजारों अभिभावकों को राहत की उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से स्कूलों की इस मनमानी से परेशान थे. अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है.

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