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हिरासत में कथित यातना और मौत के मामले में HC ने फैसला रखा सुरक्षित

Ranchi: हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में हिरासत में कथित यातना और मौत के मामले...

Ranchi: हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में हिरासत में कथित यातना और मौत के मामले में दाखिल जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया है. याचिका में लगभग 10 वर्षों के अंदर हिरासत में हुई मौतों की ज्यूडिशियल जांच एवं नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन के निर्देशों का पालन करने की मांग की गई है.

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2018 से 2025 तक 437 मौतों का आंकड़ा

गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल द्वारा दायर शपथपत्र के साथ तालिका संलग्न थी, जिसमें बताया गया कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच 437 व्यक्तियों की पुलिस या न्यायिक हिरासत में मृत्यु हुई. हालांकि तालिका में यह उल्लेख था कि मृत्यु की सूचना मजिस्ट्रेट को दी गई या नहीं, लेकिन अधिकांश मामलों में यह स्पष्ट नहीं था कि धारा 176(1-A) के तहत अनिवार्य न्यायिक जांच वास्तव में कराई गई या नहीं.

याचिकाकर्ता का पक्ष

प्रार्थी के अधिवक्ता शादाब अंसारी का कहना है कि मामले में अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है, लेकिन कई ऐसे मामले हैं जो बेहद पुराने हो चुके हैं, जिनसे संबंधित साक्ष्य जुटाना संभव नहीं है. ऐसे में अदालत अपने फैसले में दिशा-निर्देश जारी करेगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके.

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