CCTV टेंडर में सिंडिकेट की सेंधमारी की आशंका ! बाबूलाल मरांडी का दावा, चहेती कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए बदले गए नियम

Ranchi: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर टेंडर और सिंडिकेट को लेकर घमासान शुरू हो गया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी...

Ranchi: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर टेंडर और सिंडिकेट को लेकर घमासान शुरू हो गया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य के थानों में सीसीटीवी लगाने की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका जताई है. मरांडी ने आरोप लगाया है कि पुरानी निविदा (टेंडर) को महज इसलिए रद्द किया गया ताकि एक खास ‘सिंडिकेट’ और पसंदीदा संस्थान को लाभ पहुंचाने के लिए नए सिरे से भ्रष्टाचार का ताना-बाना बुना जा सके.

भ्रष्टाचारी ही सबसे बड़ा अधिकारी

मरांडी ने पत्र में कहा कि राज्य में जो जितना बड़ा भ्रष्टाचारी, वह उतना बड़ा अधिकारी का फॉर्मूला चल रहा है. उन्होंने दावा किया कि संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर कार्यरत कर्मचारियों को सेवा विस्तार न देने की धमकी देकर जबरन फाइलों को आगे बढ़वाया जा रहा है. उन्होंने मांग की है कि इस निविदा को तत्काल रद्द कर दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए.

मरांडी ने लगाए ये आरोप

• सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन: टेंडर में 2 मेगापिक्सल के कैमरे मांगे गए हैं, लेकिन रिकॉर्डिंग की शर्त पुराने 720 पी रेजोल्यूशन पर रखी गई है, जो उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है.

• चुनिंदा कंपनियों को लाभ: कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के अनुभव की ऐसी शर्त जोड़ी गई है जिसका इस प्रोजेक्ट से लेना-देना नहीं है, ताकि चुनिंदा कंपनियां ही रेस में रहें.

• यूपीएस और स्विच में खेल: कैमरों के अनुभव की तुलना में यूपीएस निर्माण का अनुभव 10 साल और टर्नओवर की शर्त अत्यधिक रखी गई है, जो किसी खास वेंडर को फायदा पहुंचाने की कोशिश है.

• चीनी कनेक्शन: साइबर सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर चीनी संयुक्त उद्यम वाली कंपनियों को भी मौका देने के द्वार खोल दिए गए हैं.

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