Hazaribagh: विकास योजनाओं को समय पर धरातल पर उतारने के सरकारी प्रयासों के बीच हजारीबाग जिला परिषद कार्यालय में टेंडर निष्पादन में देरी का मामला सामने आया है. संवेदकों का दावा है कि चार महीने से एक दर्जन से अधिक टेंडर लंबित हैं. इससे संवेदकों में नाराजगी है और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित सड़क, भवन समेत अन्य विकास कार्यों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.
10 अप्रैल को खुलना था टेंडर, अब तक प्रक्रिया अधूरी
संवेदकों ने इस मामले को लेकर उपायुक्त एवं उप विकास आयुक्त को आवेदन देकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है. आवेदन में बताया गया है कि जिला परिषद की एनआईटी संख्या 41/2025-26 के तहत टेंडर खोलने की तिथि 10 अप्रैल 2026 निर्धारित थी. इसके बावजूद निर्धारित समय बीतने के करीब चार महीने बाद भी टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है. संवेदकों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण संबंधित विकास योजनाओं का काम शुरू नहीं हो पा रहा है. इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, भवन और अन्य निर्माण कार्यों की गति पर पड़ सकता है.
एक करोड़ से अधिक के टेंडरों की फाइल भेजे जाने का दावा
संवेदकों के अनुसार, एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले टेंडरों की फाइल अधीक्षण अभियंता कार्यालय भेजे जाने की बात कही जा रही है. उनका कहना है कि फाइलों के लंबे समय तक लंबित रहने के कारण टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है. संवेदकों का यह भी कहना है कि कई महीनों से टेंडर लंबित रहने के कारण न केवल निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि संबंधित संवेदकों की कार्ययोजना और संसाधनों पर भी असर पड़ रहा है.
पारदर्शिता के साथ जल्द निष्पादन की मांग
संवेदकों ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतते हुए सभी लंबित टेंडरों का शीघ्र निष्पादन कराने की मांग की है. इस संबंध में उन्होंने जिला परिषद के जिला अभियंता आशीष आनंद से भी पक्ष जाननेभी मामले में हस्तक्षेप कर लंबित टेंडरों की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने की मांग की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकृत विकास योजनाओं का काम समय पर शुरू हो सके.
