Hazaribagh : जिले के कटकमसांडी अंचल कार्यालय से जारी दो अलग-अलग भूमि प्रतिवेदनों ने सरकारी कार्यप्रणाली और भूमि सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है. आरोप है कि एक ही खाता और प्लॉट की जमीन के संबंध में महज तीन से चार महीने के अंतराल में दो अलग-अलग प्रतिवेदन जारी किए गए. एक प्रतिवेदन में जमीन को निजी बताते हुए सरकारी योजना की स्वीकृति दिलाई गई. जबकि दूसरे मामले में उसी जमीन को सरकारी बताते हुए सामुदायिक भवन का निर्माण करा दिया गया. इस पूरे मामले ने न केवल अंचल कार्यालय की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग पर भी सवाल खड़े कर दिए है.
एक जमीन, दो विभाग और दो अलग-अलग रिपोर्ट
मामला कटकमसांडी प्रखंड के बहरवा गधा गांव का है. जानकारी के अनुसार भूमि संरक्षण विभाग ने बालकृष्ण राय के नाम पर स्थित तालाब के गहरीकरण के लिए 1,66,900 रुपये की योजना को स्वीकृति दी. इस योजना के लिए कटकमसांडी अंचल कार्यालय से जारी भूमि प्रतिवेदन के आधार पर तालाब को निजी भूमि बताते हुए योजना को स्वीकृति दी गई. वहीं दूसरी ओर, जिला परिषद की ओर से इसी भूमि के एक हिस्से पर सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जा रहा है. इसके लिए तैयार भूमि प्रतिवेदन में उसी जमीन के हिस्से को सरकारी भूमि मानते हुए निर्माण कार्य कराया गया और भुगतान भी कर दिया गया.
एक ही जमीन निजी भी और सरकारी भी
पूरे मामले का सबसे अहम प्रश्न यही है कि अगर एक ही खाता और प्लॉट की भूमि का एक हिस्सा निजी माना गया है तो उसी भूमि का दूसरा हिस्सा सरकारी कैसे घोषित कर दिया गया. अगर जमीन सरकारी थी तो निजी व्यक्ति के नाम पर तालाब गहरीकरण की योजना कैसे स्वीकृत हुई. और अगर निजी थी तो सरकारी भवन निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई. इन विरोधाभासी प्रतिवेदनों ने अंचल कार्यालय की भूमिका पर संदेह पैदा कर दिया है.
खतियान और भूमि अभिलेख भी बने विवाद का आधार
शिकायतकर्ता धीरज कुमार सिंह के अनुसार संबंधित भूमि खाता संख्या-26, प्लॉट संख्या-6, रकबा 6.38 डिसमिल है. खतियान में सुभाष राय के नाम दर्ज है. भूमि का प्रकार गैरमजरूआ खास बताया गया है. इसकी रसीद भी निर्गत होती रही है. उनका आरोप है कि इसी भूमि के एक हिस्से में तालाब है. जबकि दूसरे हिस्से पर सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जा रहा है. ऐसे में एक ही भूमि के संबंध में दो अलग-अलग प्रकार के भूमि प्रतिवेदन जारी किया जाना गंभीर अनियमितता का संकेत देता है.
DC समेत कई अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
मामले को सामने लाने वाले धीरज कुमार सिंह ने उपायुक्त DC, उप विकास आयुक्त, जिला परिषद और भूमि संरक्षण विभाग के अधिकारियों को आवेदन देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर जांच हुई तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि आखिर किस आधार पर एक ही भूमि के लिए दो अलग-अलग प्रतिवेदन जारी किए गए और किन परिस्थितियों में सरकारी योजनाओं की स्वीकृति एवं भुगतान हुआ.
सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका
अगर जांच में यह साबित होता है कि भूमि प्रतिवेदन तथयात्मक रूप से गलत तैयार किए गए, तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि सरकारी राशि के दुरुपयोग और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही का भी विषय बनेगा. ऐसे मामलों से सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगता है.
क्या कहते हैं कटकमसांडी के अंचलाधिकारी
इस संबंध में पूछे जाने पर कटकमसांडी के अंचलाधिकारी अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि संबंधित फाइल देखने के बाद ही पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी और अपना पक्ष रख पाएंगे.

अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर
दो विरोधाभासी भूमि प्रतिवेदनों के सामने आने के बाद अब पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है. अगर निष्पक्ष जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह महज त्रुटि है या फिर सरकारी योजनाओं के नाम पर भूमि प्रतिवेदन में गंभीर अनियमितता कर सरकारी धन के दुरुपयोग का रास्ता बनाया गया. फिलहाल पूरे मामले ने कटकमसांडी अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है.
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