Hazaribagh: हजारीबाग के सदानंद मार्ग पर सरकारी जमीन की लूट और रसूख का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने नगर निगम से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक में हड़कंप मचा दिया है. यह कहानी किसी फिल्मी रसूखदार की नहीं, बल्कि महज 300 वर्गफीट (30×10 फीट) सरकारी जमीन को लीज पर लेकर पूरे एक एकड़ के वीआईपी भूखंड को लील जाने वाले एक शख्स के ‘कब्जा तंत्र’ की है.
विष्णुपुरी (कदमा) निवासी योगेन्द्र कुमार ने हजारीबाग नगर निगम के महापौर को लिखित शिकायती पत्र सौंपकर सदानंद मार्ग निवासी राजेश कुमार गुप्ता (पिता स्व. गणेश कुमार गुप्ता) के इस पूरे ‘काले साम्राज्य’ का भंडाफोड़ किया है और तत्काल बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण मुक्त कराने की गुहार लगाई है.

साल 1990 का वो ₹50 वाला खेल, जो आज बन गया करोड़ों का साम्राज्य
शिकायतकर्ता ने साक्ष्यों के साथ खुलासा किया है कि 17 मार्च 1990 को तत्कालीन “नगर पालिका परिषद” की बैठक (प्रस्ताव संख्या 2) में जनहित या छोटे व्यवसाय के नाम पर राजेश कुमार गुप्ता को सदानंद मार्ग में सिर्फ 300 वर्गफीट जमीन अलॉट की गई थी. इसके लिए बकायदा ₹50 प्रति माह का किराया तय हुआ था और यह बंदोबस्ती सिर्फ 10 साल के लिए थी.
लेकिन, इन 36 वर्षों में जो हुआ वो कानून की धज्जियां उड़ाने जैसा है. लीज की मियाद कब की खत्म हो गई, लेकिन राजेश गुप्ता ने उस 300 वर्गफीट की आड़ में धीरे-धीरे पूरी एक एकड़ (लगभग 43,560 वर्गफीट) सरकारी जमीन पर अपना एकछत्र राज कायम कर लिया.
सरकारी जमीन पर आलीशान मकान, मिठाई दुकान और मछली पालन का धंधा
आरोप बेहद संगीन हैं. सरकारी जमीन, जिस पर जनता का हक होना चाहिए था, वहां आज राजेश गुप्ता का दो मंजिला आलीशान मकान खड़ा है. यही नहीं, उन्होंने वहां अपनी एक बड़ी मिठाई की दुकान खोल रखी है और बची हुई जमीन पर अवैध रूप से तालाब खुदवाकर ‘मछली पालन’ का बड़ा व्यवसाय चमका रहे हैं.
अवैध दुकानों का ‘रेंटल सिंडिकेट’: हर महीने ₹1 लाख की जेब गर्म
इस पूरे खेल का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू यह है कि सरकारी जमीन को कब्जाने के बाद उसे बकायदा एक ‘प्राइवेट मार्केट’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. राजेश गुप्ता ने इस एक एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध रूप से 10 से 12 दुकानें खड़ी कर दी हैं और उन्हें स्थानीय दुकानदारों को भाड़े पर दे दिया है.
आवेदन के मुताबिक, इस अवैध रेंटल सिंडिकेट के जरिए हर महीने करीब ₹1 लाख रुपये किराए के रूप में वसूले जा रहे हैं. इन अवैध दुकानों की जो सूची नगर निगम को सौंपी गई है, उसमें दीपक कुमार (पान दुकान), बिट्टू कुमार व बॉबी (मुर्गा दुकान), संतोष कुमार व बब्लू (डेंटिंग-पेंटिंग गैराज), हुसैन व सोहेल (मैकेनिकल व इंजन गैराज), नसीम (वेल्डिंग दुकान), इबरैल (दुकान) और सोनू कुमार (मारुति पार्ट्स दुकान) शामिल हैं.
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल, अब आर-पार के मूड में शिकायतकर्ता
हजारीबाग के इतने वीआईपी इलाके में वर्षों से खुलेआम चल रहे इस महा-अतिक्रमण पर आज तक किसी भी अधिकारी की नजर न पड़ना, प्रशासन की कार्यशैली पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े करता है. शिकायतकर्ता योगेन्द्र कुमार ने इस मामले की प्रतिलिपि उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त, हजारीबाग डीसी, सदर एसडीओ और अंचल अधिकारी को भी भेजी है. अब गेंद नगर निगम और जिला प्रशासन के पाले में है. देखना दिलचस्प होगा कि हजारीबाग की करोड़ों की सरकारी जमीन को इस ‘रेंटल किंग’ के चंगुल से छुड़ाने के लिए प्रशासन का बुलडोजर कब गरजता है.
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