Ranchi/Delhi: एनटीपीसी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली एनटीपीसी की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें जमीन अधिग्रहण का मुआवजा ₹15,783 प्रति डिसमिल तय किया गया था. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई.
क्या है मामला?
दरअसल, एनटीपीसी ने मुआवजा घटाने की मांग करते हुए 2015-2016 के बिक्री विलेख पेश किए और दलील दी कि मूल्यांकन के लिए तीन साल की अवधि 29 अप्रैल 2016 से गिनी जाए, जब नए सिरे से अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हुई थी. वहीं रैयतों और दावेदारों का तर्क था कि सही तारीख 12 जून 2019 है, जब धारा 11 के तहत अधिसूचना जारी हुई थी. इसलिए मुआवजे की गणना पिछले तीन साल यानी 12 जून 2016 से 11 जून 2019 तक के बिक्री विलेखों के आधार पर होनी चाहिए. हाईकोर्ट ने एनटीपीसी की दलीलें सिरे से खारिज कर दीं थी और अपने आदेश में कहा था, कि बाजार मूल्य तय करने की कट-ऑफ तारीख धारा 11 की अधिसूचना की तारीख यानी 12 जून 2019 ही होगी. इसलिए प्रासंगिक अवधि 12 जून 2016 से 11 जून 2019 है न कि एनटीपीसी के बताए पुराने साल.

इसके बाद एनटीपीसी ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. लेकिन सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एनटीपीसी की SLP खारिज कर दी और हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा. सुप्रीम कोर्ट में दावेदारों और रैयतों की ओर से अधिवक्ता रवि कुमार पांडेय, कमलेश कुमार मिश्रा और राजीव कुमार दुबे ने बहस की.
