RANCHI: झारखंड हाईकोर्ट में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद पर शुक्रवार को सुनवाई हुई.सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत में दलील पेश करते हुए कहा कि बिना परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों की पहचान किए और बिना दोषी अभ्यर्थियों को चिन्हित किए सभी 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना पूरी तरह मनमाना,अवैध और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है.याचिकाकर्ता किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों में शामिल नहीं रहे हैं. इसके बावजूद उन्हें भी दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है.
आयोग पर हुए सवाल खड़े
आयोग को पहले कथित अनियमितताओं में शामिल परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों और संबंधित अभ्यर्थियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए न कि निर्दोष अभ्यर्थियों को भी समान रूप से परेशान किया जाए.जिसके बाद कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए JSSC से सवाल किया कि अब तक इस प्रकरण में शामिल लोगों के खिलाफ कोई प्राथमिकी (FIR) क्यों दर्ज नहीं की गई है.
अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी
अब कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को करेगा.इस संबंध में अर्चना कुमारी एवं अन्य अभ्यर्थियों द्वारा याचिका दाखिल की गई है.याचिका में उस नोटिस को चुनौती दी गई है. जिसके जरिए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने एकतरफा फैसला लेते हुए 2819 अभ्यर्थियों को 08 मई को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया है.
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