Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय से संबद्ध लंगटा बाबा कॉलेज के व्याख्याता बिनोद कुमार राय को बड़ी राहत देते हुए उनके पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को अवैध रूप से सेवा से हटाया गया था और उन्हें 11 वर्षों तक बिना किसी गलती के परेशान होना पड़ा. ऐसे में उन्हें सेवा समाप्ति की तिथि से पुनर्बहाली तक 75 प्रतिशत बकाया वेतन, वरिष्ठता तथा अन्य सभी परिणामी सेवा लाभ दिए जाएं.
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्बहाली का अर्थ केवल नौकरी पर वापस लेना नहीं, बल्कि कर्मचारी को उसी स्थिति में बहाल करना है, जिसमें वह अवैध बर्खास्तगी से पहले था. इसलिए याचिकाकर्ता के वेतन का पुनर्निर्धारण उनकी मूल नियुक्ति की तिथि से किया जाए तथा उन्हें सभी वार्षिक वेतनवृद्धि और संशोधित वेतनमान का लाभ भी दिया जाए.
2019 के आदेश का विवादित हिस्सा रद्द
हाईकोर्ट ने 5 अप्रैल 2019 के उस आदेश के उस हिस्से को भी रद्द कर दिया, जिसमें कुलपति ने याचिकाकर्ता की कार्यक्षमता पर प्रतिकूल टिप्पणी करते हुए उन्हें प्रभारी प्राचार्य बनने के योग्य नहीं बताया था. अदालत ने कहा कि जब कुलपति ने स्वयं माना कि सेवा समाप्ति अवैध थी और नए सिरे से विभागीय कार्रवाई की छूट दी थी, तब इस तरह की पूर्वाग्रहपूर्ण टिप्पणी करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत था.
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9वीं बार हाईकोर्ट पहुंचे थे याचिकाकर्ता
अदालत ने अपने फैसले में उल्लेख किया कि यह मामला लंबे समय से चल रहा था और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए याचिकाकर्ता को नौवीं बार हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि पहले गठित तीन सदस्यीय समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं पाया था. इसके बावजूद बिना विभागीय जांच के उनकी सेवा समाप्त कर दी गई थी.
12 सप्ताह में आदेश का पालन, देरी पर 6% ब्याज
हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय और कॉलेज को निर्देश दिया है कि 12 सप्ताह के भीतर बकाया वेतन का भुगतान, वेतन पुनर्निर्धारण और सभी सेवा लाभ देने की प्रक्रिया पूरी की जाए. यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है, तो बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा.
