Ranchi: झारखंड में JPSC-JSSC सुधार को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच ‘98 फीसदी मांगें पूरी’ होने के दावे पर नया विवाद खड़ा हो गया है. JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस जानकारी को चुनौती देते हुए ‘फैक्ट चेक’ जारी किया है. रिफॉर्म मंच का कहना है कि छात्रों की मांगों को लेकर स्थिति वैसी नहीं है, जैसी सोशल मीडिया पर प्रचारित की जा रही है. मंच ने ‘X’ पर पोस्ट कर सवाल उठाया कि अगर 98 प्रतिशत मांगें पूरी हो चुकी हैं, तो 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने का लिखित आदेश अब तक सामने क्यों नहीं आया है.
‘परीक्षा रद्द हुई तो लिखित आदेश कहां है?’
रिफॉर्म मंच के मुताबिक, 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने की मांग आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल है. मंच का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से परीक्षा रद्द करने का स्पष्ट और लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक इस मांग को पूरा हुआ नहीं माना जा सकता. मंच लगातार सरकार से सवाल कर रहा है कि यदि 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया जा चुका है, तो उसका आधिकारिक नोटिफिकेशन क्यों जारी नहीं किया गया. मंच का कहना है कि केवल बातचीत या मौखिक आश्वासन के आधार पर छात्रों की मांग पूरी मानना उचित नहीं है.
सरकार और छात्रों के बीच खुली बातचीत की मांग
रिफॉर्म मंच ने सरकार और आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच मीडिया के सामने खुली बातचीत की मांग की है. मंच का कहना है कि इससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जनता के सामने स्पष्ट हो सकेगी. रिफॉर्म मंच का कहना है कि उसकी मांग केवल 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने तक सीमित नहीं है. भर्ती परीक्षाओं की जांच प्रक्रिया में भी पारदर्शिता जरूरी है. मंच के अनुसार, जब तक लिखित आदेश, आधिकारिक प्रक्रिया और जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं होती, तब तक केवल दावों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें पूरी हो चुकी हैं.
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