सुचारु एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराना बेहद जरूरी
उपायुक्त ने कहा कि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त और सुचारु एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है. उन्होंने माना कि वर्तमान व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है और इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे.
कुल 17 एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है
जानकारी के अनुसार, गुमला जिले में समानता एजेंसी के माध्यम से कुल 17 108 एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है. लेकिन इनमें से केवल चार एंबुलेंस ही गंभीर मरीजों को रांची रेफर करने की स्थिति में हैं. इस स्थिति की जानकारी जिला सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी को भी है.
न्यूज वेव ने प्रमुखता से उठाया था मामला
सदर अस्पताल प्रबंधन की ओर से एंबुलेंस व्यवस्था बेहतर करने को लेकर कई बार राज्य सरकार को पत्राचार किया जा चुका है. हाल ही में चैनपुर की एक स्कूली छात्रा की तबीयत खराब होने के बाद समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने से हुई मौत की घटना ने पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए थे. इस मामले को न्यूज वेव ने प्रमुखता से उठाया था.
सिविल सर्जन को DC ने दिए आवश्यक निर्देश
खबर के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हुई है. उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिए हैं. साथ ही सदर अस्पताल प्रबंधन को एंबुलेंस व्यवस्था बेहतर करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकार से समन्वय स्थापित करने को कहा गया है.
प्रशासन गंभीरता से काम करेगा
डीसी दिलेश्वर महतो ने स्थानीय संवाददाता से बातचीत में कहा कि एंबुलेंस की कमी एक गंभीर समस्या है और इसका समाधान करना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि किन माध्यमों से जिले में बेहतर एंबुलेंस उपलब्ध कराई जा सकती है, इस दिशा में प्रशासन गंभीरता से काम करेगा.उन्होंने कहा कि प्रयास किया जाएगा कि किसी भी गरीब मरीज को समय पर एंबुलेंस की सुविधा मिले और इलाज के लिए उसे परेशानी का सामना न करना पड़े.

स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी की जाएगी चर्चा
उपायुक्त के अनुसार, गुमला जिले की लगभग 80 प्रतिशत आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सदर अस्पताल पर निर्भर है. ऐसे में सदर अस्पताल की व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है.डीसी ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी चर्चा की जाएगी और सामूहिक प्रयास से एंबुलेंस व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा.जिला प्रशासन की इस पहल को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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