NewsWave Desk : सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का एक और बयान आया है. जहां पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह ने कहा कि पाकिस्तान के लिए सिंधु जल संधि का मुद्दा नेशनल सिक्योरिटी का मामला है. अली शाह ने कहा कि पिछले साल अप्रैल से चिनाब नदी की धारा में उतार-चढ़ाव को लेकर हमने भारत को चार बार पत्र लिखा, लेकिन वहां से अब तक कोई जिवाब नहीं आया है. सिंधू जल संधि पर भारत के सख्त रूख के बाद पाकिस्तान में हलचल है. मेहर अली ने कहा कि चिनाब नदी के पानी के बहाव में होने वाला बदलाव पाकिस्तान के लिए रणनीतिक खतरा है. उन्होंने कहा, ऐसा क्यों हो रहा है इससे पीछे की वजह और प्रोजेक्ट्स से जुड़ा डेटा भारत को देना चाहिए. भारत इस मामले पर कोई जवाब नहीं दे रहा है और भारत की चुप्पी पाकिस्तान के लिए खतरा है.
पानी के उतार चढ़ाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
अली शाह ने कहा कि नदी के निचले हिस्से में मौजूद कोई भी जिम्मेदार देश या अधिकारी पानी के उतार-चढ़ाव को आम बात मानकर नजरअंदाज नहीं कर सकता. इससे नीचे रहने वाले लोगों की सुरक्षा जुड़ी है. सिंधु जल आयोग का गठन इन्हीं घटनाओं की जांच करने के लिए किया गया है. भारत की ओर से इस जल संधि को स्थगित रखने के बावजूद, पाकिस्तान ने पिछले साल इंटरनेशनल वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के तहत डेटा शेयर करने के चैनल को सक्रिय रखने की कोशिश की थी.

पाकिस्तान ने की भारत से ये मांगे
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार मेहर अली शाह का आरोप है कि पाकिस्तान तो सिंधु जल संधि के नियमों का पूरी तरह पालन कर रहा है, लेकिन भारत की तरफ से कोई जवाब या सहयोग नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा, अगस्त 2023 के बाद से न तो कोई दौरा हुआ है और न ही डेटा सौंपा गया है. इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने का खतरा है. सिंधु जल संधि को लेकर मेहर अली ने भारत से तीन मांगें की. जिसमें पहला, भारत और पाकिस्तान के कमिशन की तुरंत बैठक बुलाई जाए. दूसरा, दोबारा पानी का डेटा शेयर करना शुरू हो. तीसरा, दोनों देशों के अधिकारियों के दौरे और निरीक्षण फिर से शुरू हो.
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