Hazaribagh: कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल झारखंड प्रदेश कांग्रेस महासचिव सुरजीत नागवाला के नेतृत्व में बरकट्ठा के पूर्व प्रत्याशी अशोक कुमार देव, कांग्रेस के जिला प्रवक्ता मनोज नारायण भगत और इंटक के प्रदेश महासचिव धीरज कुमार सिंह के साथ उपायुक्त के नाम ज्ञापन देने उपायुक्त कार्यालय पहुंचा. ज्ञापन में हजारीबाग से जुड़ी जनहित की गंभीर समस्याओं और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की गई.
13 करोड़ 97 लाख रुपये के कार्य पर सवाल
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव सुरजीत नागवाला ने हजारीबाग जिले की जनहित से जुड़ी समस्याओं एवं कथित अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया. उन्होंने उपायुक्त को पत्र देकर मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की.
ज्ञापन में कहा गया है कि ऐतिहासिक हजारीबाग झील के सौंदर्यीकरण के लिए आवंटित 13 करोड़ 97 लाख रुपये से कराए गए कार्यों की गुणवत्ता एवं उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. मामले की जांच के लिए सक्षम तकनीकी अधिकारियों की निगरानी में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की गई है.
सरकारी जमीन, नदी, नाला और तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग
ज्ञापन में जिले के विभिन्न अंचलों में सरकारी जमीन, नदियों, नालों और तालाबों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया है. कांग्रेस का कहना है कि इससे पारंपरिक जलस्रोत प्रभावित हो रहे हैं और बरसात के मौसम में जल-जमाव की समस्या उत्पन्न हो रही है. पत्र में विशेष अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने की मांग की गई है.
आवास बोर्ड कॉलोनी में अवैध कब्जे का आरोप
पत्र में आरोप लगाया गया है कि हजारीबाग आवास बोर्ड कॉलोनी की जमीन एवं मकानों पर अवैध कब्जा किया जा रहा है. इससे जरूरतमंद और वास्तविक लाभुकों को आवास का लाभ नहीं मिल पा रहा है. कांग्रेस ने ऐसे कथित अवैध कब्जों को अभियान चलाकर हटाने की मांग की है.
सारंगाढ़ खुर्द में सरकारी जमीन और सामुदायिक भवन निर्माण पर सवाल
उपायुक्त के नाम दिए गए एक अन्य आवेदन में इंटक के प्रदेश महासचिव धीरज कुमार सिंह ने कटकमसांडी प्रखंड के सारंगाढ़ खुर्द में सरकारी जमीन एवं सामुदायिक भवन निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाया है. आवेदन में सरकारी तंत्र और भू-माफियाओं की मिलीभगत से कथित भू-घोटाला किए जाने का आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की गई है.
पत्र के अनुसार, खाता संख्या 26 और प्लॉट संख्या 6 से जुड़े मामले में भू-घोटाले तथा सामुदायिक भवन में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है. कांग्रेस का दावा है कि एक ही जमीन के संबंध में दो विरोधाभासी रसीदें जारी की गईं. मार्च 2025 में उक्त जमीन को सरकारी गैर-मजरुआ जमीन बताते हुए सामुदायिक भवन के लिए उपयोग किए जाने का उल्लेख किया गया, जबकि जनवरी 2026 में उसी जमीन पर 16,06,900 रुपये की लागत से तालाब निर्माण का प्रावधान दर्शाया गया.
पत्र में यह भी कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई और निर्माण कार्य जारी है. कांग्रेस ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है.
निर्माण पर रोक और राशि की वसूली की मांग
कांग्रेस ने विवादित सामुदायिक भवन के निर्माण पर तत्काल रोक लगाने, डीसी, सीओ एवं संबंधित अधिकारियों के स्तर पर जांच कर दोषियों को चिन्हित करने की मांग की है.
इसके अलावा तालाब निर्माण में खर्च किए जा रहे 16,06,900 रुपये एवं भवन निर्माण में लगी राशि की 100 प्रतिशत वसूली तथा कुर्की की कार्रवाई करने की मांग की गई है. संबंधित अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की भी मांग की गई है.
जनहित के मामलों में कार्रवाई की मांग
कांग्रेस जिला प्रवक्ता मनोज नारायण भगत ने कहा कि जनहित से जुड़े इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए. दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने प्रशासन से आम जनता के हितों की रक्षा और सरकारी संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की.
