Hazaribagh: हजारीबाग की राजनीति में इन दिनों जनप्रतिनिधियों को लेकर सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. बिजली-पानी की समस्याओं और अन्य स्थानीय मुद्दों के बीच जनता का मूड बदलता हुआ नजर आ रहा है, जिसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में भी हो रही है.
हजारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद का राजनीतिक सफर इसका एक उदाहरण माना जा रहा है. वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में विरोधी उन्हें जमीन कारोबारी बताकर निशाना बनाते थे. हालांकि 2024 के चुनाव तक उनकी छवि एक जमीनी नेता के रूप में उभरकर सामने आई. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जनता के बीच बनी सकारात्मक धारणा ने उनकी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

रजरप्पा में विधायक के कार्यक्रम को लेकर चर्चा
बुधवार को बिजली और पानी की समस्या के बीच विधायक प्रदीप प्रसाद अपने समर्थकों के साथ रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर पहुंचे. यहां पूजा-अर्चना के बाद सामूहिक भोज का आयोजन भी किया गया. इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है. खास बात यह रही कि कार्यक्रम में सांसद मनीष जायसवाल के विरोधी माने जाने वाले कुछ चेहरे भी मौजूद दिखे. इसके बाद भाजपा की अंदरूनी राजनीति और संभावित नए समीकरणों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं.
सांसद मनीष जायसवाल की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने विधायक और सांसद के रूप में लगातार जनसमर्थन हासिल किया है. कोरोना काल में उनके सेवा कार्यों और सामूहिक विवाह कार्यक्रमों की काफी चर्चा हुई थी. हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर उनकी कार्यशैली को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां भी देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग उनके पुराने कार्यों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि समर्थक अब भी उनके योगदान को महत्वपूर्ण मानते हैं. शहर में यह चर्चा भी चल रही है कि सांसद के पारिवारिक व्यवसाय और राजनीतिक भूमिका को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है. वहीं कुछ लोग उनके जनसंपर्क में कमी आने की बात भी कह रहे हैं. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
मेयर चुनाव का उदाहरण भी चर्चा में
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी चुनाव में केवल पार्टी का नाम या चुनावी नारे ही जीत की गारंटी नहीं होते. हजारीबाग के पिछले मेयर चुनाव का उदाहरण भी दिया जा रहा है, जहां भाजपा समर्थित उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा था.
स्थानीय राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जनता का मूड और जमीनी मुद्दे हमेशा चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं. ऐसे में जनप्रतिनिधियों के लिए जनता की अपेक्षाओं और बदलते माहौल को समझना महत्वपूर्ण होगा.


