Ranchi: झारखंड में संविदा के आधार पर कार्यरत लगभग 2,200 सहायक पुलिसकर्मियों को सेवा विस्तार मिल सकता है. जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार के स्तर पर सहायक पुलिसकर्मियों के सेवा विस्तार का मामला प्रक्रियाधीन बताया जा रहा है. गृह विभाग ने सेवा विस्तार से जुड़ा प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति हेतु वित्त विभाग को भेज दिया है. आगामी कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है.

जवानों का अनुबंध समाप्त होने के कगार पर है
राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों में तैनात इन जवानों का अनुबंध समाप्त होने के कगार पर है, जिससे उनके बीच असंतोष और बेचैनी लगातार बढ़ रही है.
सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया से जवानों में रोष
कई जिलों में तैनात जवानों को मौखिक रूप से सेवा से क्लोज करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जबकि जमशेदपुर में बाकायदा लिखित पत्र जारी कर जवानों को क्लोज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में जवानों के बीच अपने रोजगार को लेकर भारी संशय बना हुआ है.
साल 2017 में हुई थी संविदा बहाली
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जिला पुलिस को सहयोग देने के उद्देश्य से तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2017 में 12 जिलों में इन सहायक पुलिसकर्मियों की संविदा पर नियुक्ति की थी. वर्तमान में ये जवान 12 जिलों में सेवा दे रहे हैं. जिनमें दुमका, गिरिडीह, पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा, सिमडेगा, गुमला, खूंटी, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम शामिल हैं.
आंदोलन और रांची कूच की चेतावनी
मानदेय को बढ़ाकर 13,000 प्रति माह करने और 4,000 वार्षिक वर्दी भत्ता देने पर सरकार की ओर से पूर्व में सहमति बनी थी, लेकिन जवानों की मुख्य मांग स्थायी नियुक्ति और सेवा सुरक्षा की है. पूर्व में दो बार उग्र आंदोलन कर चुके सहायक पुलिसकर्मियों ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं. यदि जल्द ही सेवा विस्तार और स्थायीकरण पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे एक बार फिर राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान की ओर कूच करेंगे और राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे.

