Ranchi: झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे आंदोलनकारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया, लेकिन प्रशासन ने उन्हें सिद्धू-कान्हू पार्क के पास रोक दिया. इसके बाद मौके पर तनाव और गहमागहमी का माहौल बन गया. इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई और वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए रहे. आंदोलनकारियों का कहना है कि राज्य निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले लोगों को आज भी वह सम्मान और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जिनका वादा अलग राज्य गठन के समय किया गया था.
50 हजार पेंशन और सीधी नौकरी की मांग
मोर्चा ने सरकार से मांग की कि झारखंड आंदोलनकारियों को 50 हजार रुपये मासिक सम्मान पेंशन दी जाए. साथ ही आंदोलनकारियों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा, समूह बीमा, यात्रा कूपन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी सुनिश्चित किया जाए. इसके अलावा संगठन ने यह भी मांग रखी कि आंदोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी सेवाओं में सीधी नियुक्ति दी जाए, ताकि परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके.

आयोग पुनर्गठन और छूटे आंदोलनकारियों की पहचान की मांग
मोर्चा ने झारखंड आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग के पुनर्गठन की मांग उठाते हुए कहा कि बड़ी संख्या में वास्तविक आंदोलनकारी अब भी सूची से बाहर हैं. ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें भी सरकारी लाभ दिया जाना चाहिए. साथ ही संगठन ने यह भी कहा कि आंदोलनकारी मान्यता के लिए जेल जाने की शर्त को हटाया जाए, क्योंकि कई वास्तविक प्रतिभागी केवल तकनीकी कारणों से लाभ से वंचित रह जाते हैं. आंदोलनकारियों ने झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन को राज्य का सर्वोच्च आंदोलनकारी सम्मान देने की भी मांग की. इसके लिए गजट अधिसूचना जारी करने की अपील की गई.
भाषा, संस्कृति और रोजगार पर भी उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान झारखंडी भाषाओं- कुड़ुख, मुंडारी, हो, संथाली, खड़िया, नागपुरी, खोरठा, कुरमाली और पंचपरगनिया में प्रारंभिक शिक्षा लागू करने की मांग उठाई गई. इसके अलावा आंदोलनकारियों ने सीएनटी-एसपीटी एक्ट और पांचवीं अनुसूची के सख्त पालन, स्थानीय युवाओं को रोजगार, उद्योग विकास, विस्थापितों के पुनर्वास और कृषि को उद्योग का दर्जा देने की भी मांग रखी.
मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार के साथ पूर्व में हुई बैठकों में पेंशन, बीमा और अन्य सुविधाओं का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. इसी कारण आंदोलनकारी सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है.
