झारखंड: सरकारी खजाने में सेंध या लापरवाही? 96 करोड़ का हिसाब गायब, स्वास्थ्य और गृह विभाग ने तोड़े वित्तीय अनुशासन के सारे रिकॉर्ड

रांची: झारखंड में सरकारी खजाने के प्रबंधन को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है. राज्य के विभिन्न विभागों में वित्तीय अनुशासन...

रांची:  झारखंड में  सरकारी खजाने के प्रबंधन को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है. राज्य के विभिन्न विभागों में वित्तीय अनुशासन की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, करीब 96 करोड़ 71 लाख रुपये से अधिक का पक्का हिसाब सरकारी फाइलों में दबा पड़ा है. वित्तीय वर्ष 2023-24 से लेकर 2025-26 तक के करोड़ों रुपये के डीसी बिल (Detailed Contingent Bills) अब तक कोषागार (Treasury) में जमा नहीं किए गए हैं.

जाने क्या है एसी और डीसी बिल का पूरा खेल?:

सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त वित्तीय प्रक्रिया निर्धारित है.एसी बिल (Abstract Contingent Bill) किसी आपात स्थिति या आकस्मिक कार्य के लिए विभाग बिना तत्काल वाउचर के एडवांस पैसा निकालते हैं. जबकि डीसी बिल (Detailed Contingent Bill) नियमत, एसी बिल के माध्यम से निकाली गई राशि को खर्च करने के बाद, विभाग को पाई-पाई का हिसाब, वाउचर और रसीदों के साथ कोषागार में जमा करना होता है. हैरानी की बात यह है कि जिस पैसे का हिसाब हफ्तों में मिल जाना चाहिए था, वह सालों से लापता है. बिना डीसी बिल के यह स्पष्ट कर पाना असंभव है कि करोड़ों की यह राशि सही जगह खर्च हुई है या नहीं.

सूची में स्वास्थ्य विभाग टॉप पर:

आंकड़ों का विश्लेषण करें तो स्वास्थ्य विभाग सबसे बड़ा डिफॉल्टर बनकर उभरा है. इस विभाग ने अकेले 78 करोड़ रुपये से अधिक का हिसाब दबा रखा है. संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद इतनी बड़ी राशि का हिसाब न मिलना व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है. वहीं, सुरक्षा और कानून व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाला गृह विभाग भी इस मामले में पीछे नहीं है. गृह विभाग का 25 करोड़ रुपये से अधिक का बिल लंबित है.

विभाग लंबित डीसी बिल की राशि (रुपये में):

• स्वास्थ्य विभाग: 78 करोड़ 66 लाख 89 हजार 929

• गृह विभाग: 25 करोड़ 58 लाख 35 हजार 345

• पर्यटन विभाग: 10 करोड़ 93 लाख 40 हजार 828

• डोरंडा ट्रेजरी: 9 करोड़ 14 लाख 41 हजार 117

• अन्य: (IT, श्रम, निर्वाचन) लगभग 2.5 करोड़

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *