Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य के मछुआरा समुदायों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए ‘वेद व्यास आवास योजना’ के कार्यान्वयन और व्यय की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है. इस योजना के तहत राज्य भर में 405 पात्र मछुआरा परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए जाएंगे. इसके लिए सरकार ने कुल 7 करोड़ 74 लाख 36 हजार रुपये की राशि आवंटित की है.
क्या है योजना का मुख्य उद्देश्य
वेद व्यास आवास योजना का प्राथमिक उद्देश्य उन सक्रिय मछुआरों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, जो वर्तमान में गरीबी रेखा से नीचे हैं और कच्चे या फूस के घरों में रहने को मजबूर हैं. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह एक चालू प्रकृति की योजना है, जिसके तहत क्लस्टर आधारित विकास को प्राथमिकता दी जाएगी.

प्रशासन और जवाबदेही
योजना के सफल कार्यान्वयन की जिम्मेदारी जिला मत्स्य पदाधिकारी-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी की होगी. विभागीय स्तर पर निदेशक (मत्स्य) इस योजना के नियंत्री पदाधिकारी होंगे, जबकि कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव सर्वोच्च नियंत्री पदाधिकारी के रूप में कार्य करेंगे. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि धरातल पर कार्य और कागजी ब्यौरे में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित जिला मत्स्य पदाधिकारी इसके लिए सीधे जिम्मेदार होंगे.
क्या होगी लाभुकों के चयन की प्रक्रिया
- चयन समिति: लाभुकों का चयन संबंधित जिले के उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी, जिसमें स्थानीय विधायक या उनके प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.
- पात्रता: आवेदक सक्रिय मत्स्य पालक या मछुआरा होना चाहिए। प्राथमिकता उन लोगों को दी जाएगी जो कच्चे घरों में रह रहे हैं. एक परिवार को एक ही आवास देय होगा.
- आरक्षण और प्राथमिकता: प्रक्रिया के अनुसार, दिव्यांगों के लिए कुल स्वीकृत राशि का कम से कम 3 प्रतिशत और महिलाओं के लिए न्यूनतम 10 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित रखा गया है. साथ ही, महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी.
- दोहराव पर रोक: जो लाभार्थी पूर्व में इंदिरा आवास या किसी अन्य सरकारी आवास योजना का लाभ ले चुके हैं, उन्हें इस योजना में शामिल नहीं किया जाएगा.
निर्माण और वित्तीय सहायता
- आर्थिक सहायता: प्रति लाभुक अधिकतम 1.91 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सीधे लाभुक के बैंक खाते में भेजी जाएगी.
- निर्माण चरण: राशि की निकासी कार्य की प्रगति के आधार पर चार चरणों में होगी: प्लिंथ स्तर पर 20%, छत स्तर पर 15%, छत ढलाई पर 40% और फिनिशिंग के लिए 25% राशि जारी की जाएगी.
- गुणवत्ता और निगरानी: आवास का निर्माण लाभुक की निजी जमीन पर होगा. निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘जियो-टैगिंग’ अनिवार्य की गई है और पूरी प्रक्रिया की निगरानी ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी के माध्यम से की जाएगी. निर्मित आवासों का रंग एक समान नीला रखा जाएगा।
जिलावार भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य
- रांची: 40 आवासों के लिए 76.48 लाख रुपये.
- पलामू: 35 आवासों के लिए 66.92 लाख रुपये.
- कोडरमा: 30 आवासों के लिए 57.36 लाख रुपये.
- बोकारो: 25 आवासों के लिए 47.80 लाख रुपये.
- गोड्डा: 25 आवासों के लिए 47.80 लाख रुपये.
- धनबाद: 24 आवासों के लिए 45.88 लाख रुपये.
- गढ़वा: 24 आवासों के लिए 45.88 लाख रुपये.
- गिरिडीह: 22 आवासों के लिए 42.06 लाख रुपये.
- देवघर: 32 आवासों के लिए 61.18 लाख रुपये.
- दुमका और साहेबगंज: प्रत्येक जिले को 12-12 आवासों के लिए 22.94 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं.
- जामताड़ा: 18 आवासों के लिए 34.41 लाख रुपये.
- गुमला: 18 आवासों के लिए 34.41 लाख रुपये.
- लातेहार: 14 आवासों के लिए 26.76 लाख रुपये।
- पश्चिम सिंहभूम: 16 आवासों के लिए 30.59 लाख रुपये.
- खूंटी: 8 आवासों के लिए 15.29 लाख रुपये.
- सिमडेगा और लोहरदगा: प्रत्येक जिले को 10-10 आवासों के लिए 19.12 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं.
- रामगढ़: 10 आवासों के लिए 19.12 लाख रुपये.
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