झारखंड राज्यसभा चुनाव: सरयू राय की चेतावनी ने बढ़ाई सियासी तपिश, भाजपा और झामुमो को किया आगाह, सिर्फ स्थानीय उम्मीदवारों के नाम पर ही करें विचार

Ranchi: झारखंड की सियासत में एक बार फिर उच्च सदन (राज्यसभा) की दो सीटों को लेकर सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है....

Saryu Rai
विधायक सरयू राय

Ranchi: झारखंड की सियासत में एक बार फिर उच्च सदन (राज्यसभा) की दो सीटों को लेकर सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है. दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई सीट और भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने के कारण राज्य में अगले महीने चुनावी बिसात बिछने जा रही है. संख्या बल के लिहाज से दोनों सीटें सत्ताधारी और विपक्ष के पाले में आसानी से जाती दिख रही हैं, लेकिन इस बीच जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है. सरयू राय ने आशंका जताई है कि राजनीतिक रसूख रखने वाले कुछ बड़े उद्योगपति इस चुनाव में धनबल के सहारे एक सीट पर सेंधमारी की कोशिश कर सकते हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को आगाह करते हुए अपील की है कि वे बाहरी ‘मनी पावर’ को रोकने के लिए सिर्फ स्थानीय उम्मीदवारों के नाम पर ही विचार करें.

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सत्ता पक्ष भारी, लेकिन अंतरात्मा की आवाज का डर

झामुमो-कांग्रेस (महागठबंधन) की स्थिति: सत्ताधारी खेमे के पास कुल 56 विधायकों का भारी-भरकम समर्थन है. इसमें अकेले झामुमो के पास 34, कांग्रेस के पास 16, राजद के पास 4 और भाकपा-माले के पास 2 विधायक हैं. संख्या बल के हिसाब से गठबंधन दोनों सीटों पर आसानी से कब्जा जमा सकता है. झामुमो के सामने गुरु जी की विरासत को संभालने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस भी अपने लिए एक सीट का दावा ठोक सकती है.

भाजपा की स्थिति: विपक्षी खेमे यानी एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं (भाजपा के 21, आजसू, एलजेपी और जेडीयू के एक-एक विधायक)। तकनीकी रूप से भाजपा के पास अपने दम पर सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन पार्टी ने एक सीट पर उम्मीदवार उतारने का दावा कर सस्पेंस बढ़ा दिया है.

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हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका और स्थानीयता का सवाल

सरयू राय ने अगाह किया है कि बिना झामुमो या भाजपा के गुप्त समर्थन के किसी बाहरी धनकुबेर की एंट्री मुमकिन नहीं है. दोनों शीर्ष नेताओं को झारखंड के माटी के लाल पर ही विचार करना चाहिए. सरयू राय के इस बयान ने 2012 के उस बदनाम राज्यसभा चुनाव की यादें ताजा कर दी हैं, जब नोटों के बदले वोट (हॉर्स ट्रेडिंग) के आरोप लगे थे और चुनाव रद्द करना पड़ा था. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कोई निर्दलीय उद्योगपति मैदान में उतरता है, तो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ जाएगा. ऐसे में अब पूरी गेंद हेमंत सोरेन और बाबूलाल मरांडी के पाले में है.

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