झारखंड: CID मुख्यालय में 20 साल से जमे हैं कई पुलिसकर्मी, प्रोन्नति के बाद भी नहीं हुआ तबादला

Dheeraj Kumar Ranchi: राज्य के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) मुख्यालय में कई ऐसे पुलिस पदाधिकारी और कर्मी हैं, जो पिछले 20 वर्षों...

Dheeraj Kumar

Ranchi:  राज्य के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) मुख्यालय में कई ऐसे पुलिस पदाधिकारी और कर्मी हैं, जो पिछले 20 वर्षों से एक ही जगह पर पदस्थापित है. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई कर्मियों को इस दौरान प्रोन्नति (प्रमोशन) भी मिली है, लेकिन इसके बावजूद वे CID मुख्यालय से अन्य जगह या अन्य विंग में ट्रांसफर नहीं हुआ है. एक ही जगह पर तैनाती की वजह से अन्य पुलिसकर्मियों की गोपनीयता भंग होने का डर सताता रहा है.  आरक्षी अशोक कुमार, मनीष कुमार समेत अन्य कई ऐसे आरक्षी और पुलिसकर्मी है जो लंबे समय से CID मुख्यालय में पोस्टेड है. कई पुलिसकर्मियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यहां पर जितने भी लंबे समय से पोस्टेड हैं उनके ऊपर बड़े-बड़े अधिकारियों का आशीर्वाद प्राप्त है.

इसके अलावे ASI स्टेनो मनोज कुमार, वीर सत्येंद्र कुमार, सोहन मांझी, किशुन भगत, अभिमन्यु कुमार, वसंत कुमार शर्मा, विलोचन कुमार सिंह ये सभी ऐसे पुलिस कर्मी है जिनको प्रमोशन तो मिला है. लेकिन CID मुख्यालय के अलावा और कहीं अन्य जगह नहीं मिला है. ये सभी वर्ष 2023 एवं 2024 में आरक्षी से ASI बने है. लेकिन ये सभी इतने पावरफुल हैं कि इनका कोई ट्रांसफर एक विंग से दूसरे विंग में नहीं किया गया है.

सूत्रों के अनुसार, CID में तैनात इन पुलिसकर्मियों में आरक्षी (कांस्टेबल) से लेकर इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल है. सामान्य प्रशासनिक नियमों के तहत पुलिसकर्मियों का एक निश्चित अवधि के बाद तबादला किया जाना चाहिए, ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गतिशीलता बनी रहे. हालांकि, CID मुख्यालय के मामले में इन नियमों का पूरी तरह पालन होता नहीं दिख रहा है. कई पुलिसकर्मी अपने सेवाकाल का एक बड़ा हिस्सा इसी एक विंग में बिता चुके हैं, जिससे अन्य पुलिसकर्मियों को इस महत्वपूर्ण अनुसंधान विंग में कार्य करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है.

प्रमोशन के बाद भी यथास्थिति बरकरार

आमतौर पर पुलिस विभाग में पदोन्नति मिलने के बाद संबंधित अधिकारी या कर्मी का तबादला दूसरे जिला या विंग में कर दिया जाता है. इसका उद्देश्य नए पद के दायित्वों को नए परिवेश में लागू करना होता है. लेकिन CID मुख्यालय में इसके विपरीत स्थिति देखी जा रही है. यहां तैनात कई कर्मियों को ASI से सब-इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर के पद पर प्रोन्नति तो मिली, लेकिन उनके रसूख या विभागीय आवश्यकताओं के नाम पर उन्हें सीआईडी मुख्यालय में ही रोके रखा गया.

पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर रोटेशन पॉलिसी के तहत तबादलों की सूची जारी की जाती है, लेकिन CID का यह विशेष मामला अब ध्यानाकर्षण का केंद्र बना हुआ है. एक ही जगह पर लंबे समय से टीके रहने के कारण अन्य पुलिसकर्मी अपनी कामों को गोपनीयता रखने में असहज महसूस कर रहे है. पुलिसकर्मी बताते हैं कि लंबे समय से एक ही जगह पर टीके रहने के कारण सारी सूचनाएं को गोपनीय रखना मुश्किल होता है.

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