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झारखंड पर्यटन का नया उदय, ‘माइनिंग टूरिज्म और प्राकृतिक सौंदर्य’ से वैश्विक मंच पर दस्तक, स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन कार्यक्रम में गूंजी झारखंड की विकास गाथा

Ranchi/Delhi : डिजिटल युग की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, अगर आपको असली सुकून और प्रकृति की गोद में समाहित होना है,...

झारखंड के पर्यटन मंत्री सुदिव्य सोनू

Ranchi/Delhi : डिजिटल युग की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, अगर आपको असली सुकून और प्रकृति की गोद में समाहित होना है, तो अपना मोबाइल एक तरफ रख दीजिए और झारखंड की ओर कदम बढ़ाइये. यह कहना है झारखंड के पर्यटन मंत्री सुदिव्य सोनू का, जिन्होंने नई दिल्ली में चल रहे स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन कार्यक्रम के दूसरे दिन झारखंड की पर्यटन क्षमता का एक ऐसा खाका खींचा, जो न केवल निवेशकों को आकर्षित करता है, बल्कि राज्य की नई पहचान को भी परिभाषित करता है.

प्रकृति के साथ जिंदगी का असली अर्थ

पर्यटन मंत्री सुदिव्य सोनू ने दिल्ली के मंच से पूरे देश को झारखंड आने का न्योता दिया. उन्होंने कहा, “जिंदगी क्या है, यह महसूस करना है तो मोबाइल हटाकर झारखंड आएं. यहां आपको प्रकृति भी दिखेगी और जिंदगी का असली अर्थ भी. मंत्री ने जोर देकर कहा कि झारखंड केवल खनिज संपदा का प्रदेश नहीं है, बल्कि ‘नेचर’ ने इसे अपार प्राकृतिक सौंदर्य का वरदान दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अब अपनी बात को केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर देश की विकास यात्रा में ताल से ताल मिलाकर चलना चाहती है.

माइंस टूरिज्म, एक नई परिकल्पना

झारखंड की पारंपरिक पहचान माइंस और मिनरल्स की रही है. लेकिन अब इस पहचान को प्राकृतिक सौंदर्य के साथ जोड़कर माइनिंग टूरिज्म की नई परिकल्पना को धरातल पर उतारा जा रहा है. सुदिव्य सोनू ने घोषणा की कि अब माइंस के दरवाजे पर्यटकों के लिए खोले जाएंगे. सरकार का लक्ष्य है कि देश के हर कोने तक झारखंड की इन अनूठी खूबियों की चर्चा हो. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस कार्यक्रम में मिल रहे सुझावों को गंभीरता से अमल में लाया जाएगा, क्योंकि बड़ी आधारभूत संरचनाओं से ज्यादा मानव जीवन में गुणात्मक परिवर्तन मायने रखता है. झारखंड की नई ‘होम स्टे पॉलिसी’ को उन्होंने राज्य के लिए गेम-चेंजर बताया.

सरकार और निवेशकों का साझा संकल्प

पर्यटन सचिव मुकेश कुमार ने विश्वास दिलाते हुए कहा कि झारखंड की टूरिज्म पॉलिसी देश की बेहतरीन पॉलिसियों में से एक होगी. राज्य सरकार फाइव स्टार होटलों के लिए जमीन उपलब्ध कराने के साथ-साथ निवेशकों को आकर्षक इंसेंटिव भी देगी. उन्होंने कहा कि झारखंड का मौसम हमेशा सुहावना रहता है और हमारे पास स्किल्ड मैनपावर की कोई कमी नहीं है. इस कार्यक्रम में शामिल हुए आईएफएस IFS अधिकारी एचआर नटेशन ने झारखंड को लैंड ऑफ फॉरेस्ट बताते हुए कहा कि जलप्रपात से लेकर लैंडस्केप तक, यहां सब कुछ मौजूद है. इस वर्ष सरकार ने नेतरहाट, सारंडा और हजारीबाग समेत 10 प्रमुख पर्यटन स्थलों को चिन्हित कर उनके विकास की रूपरेखा तैयार की है.

पारसनाथ का गौरव और भविष्य की राह

राज्य के पर्यटन मंत्री ने जैनियों के सबसे बड़े तीर्थ स्थल पारसनाथ का विशेष उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पूरी कैबिनेट बाहें फैलाकर निवेशकों के स्वागत के लिए तैयार है. सुदिव्य सोनू ने कहा, झारखंड का जादू ऐसा है कि यहां से निकला हर व्यक्ति बाहर जाकर भी राज्य का नाम रोशन करता है. यह कंसल्टेशन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि झारखंड की एक नई आर्थिक और सांस्कृतिक यात्रा की शुरुआत है. आने वाले समय में अहमदाबाद जैसे शहरों में भी इस तरह के आयोजन कर झारखंड अपनी बात को और मजबूती से रखेगा.

विशेषज्ञों की राय : झारखंड की ताकत और संभावनाए

• सौभाग्य महापात्रा : उन्होंने कहा कि माइनिंग टूरिज्म एक बेहतरीन पहल है. जिसे न्यू लुक देने की आवश्यकता है. साथ ही स्पिरिचुअल टूरिज्म, बेहतर कनेक्टिविटी और अधिक एयरपोर्ट्स के निर्माण पर जोर दिया.
• रवि गोसाईं : उन्होंने ब्रांडिंग, सेफ्टी, मैनेजमेंट और ट्राइबल टूरिज्म को राज्य का सिग्नेचर बताते हुए कहा कि आने वाला दशक ‘स्लो टूरिज्म’ का है. जिसमें झारखंड पूरी दुनिया में एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बनकर उभरेगा.
• भास्कर बरुआ और प्रीति सत्यानारायण : दोनों ने एकमत से कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में झारखंड की क्षमताएं असीमित है.
• श्रुति : झारखंड की निवासी श्रुति ने भावुक होते हुए कहा कि झारखंड एक नेचुरल स्टेट है. यहां सब कुछ पहले से ही असाधारण है, हमें बस उसे सही तरीके से पेश करना है.

निवेश का बेहतरीन माहौल : उद्योगपतियों का अनुभव

होटल व्यवसाय से जुड़े पवन बजाज ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि झारखंड एक नौजवान स्टेट है. उन्होंने बताया कि रांची में 132 कमरों वाला अपना होटल शुरू करने में उन्हें लाइसेंस और अन्य औपचारिकताओं में कहीं कोई परेशानी नहीं हुई. यह इस बात का प्रमाण है कि झारखंड में व्यापार और निवेश के लिए स्थितियां कितनी अनुकूल है.

 

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