Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है. 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) का परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. परिणाम में पारदर्शिता, कट-ऑफ अंक, हस्ताक्षर, रोल नंबरों के बड़े गैप और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर JPSC की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है. दरअसल, पिछले करीब दो दशकों में JPSC की लगभग हर बड़ी भर्ती परीक्षा किसी न किसी विवाद, कोर्ट केस, परिणाम संशोधन या जांच के घेरे में रही है. इसका सबसे बड़ा नुकसान उन हजारों युवाओं को हुआ, जिन्हें नौकरी मिलने में वर्षों का इंतजार करना पड़ा.
14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम पर नया विवाद
अप्रैल 2026 में आयोजित 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जुलाई में जारी किया गया. परिणाम सामने आते ही भाजपा ने इसे लेकर कई सवाल उठाए. पार्टी ने आरोप लगाया कि आयोग ने कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए, परिणाम पत्र पर सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही. भाजपा ने परीक्षा रद्द कर CBI जांच की मांग की है. इधर अभ्यर्थियों ने भी परिणाम में कई तकनीकी और प्रक्रियागत सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि परिणाम सूची में रोल नंबर 2601290656 के बाद सीधे 2601291488 से चयनित अभ्यर्थियों के नाम शुरू हो रहे हैं. यानी बीच के 832 रोल नंबर परिणाम सूची से गायब हैं. अभ्यर्थियों का सवाल है कि क्या इतने बड़े समूह के सभी अभ्यर्थी अनुत्तीर्ण हो गए, सभी अनुपस्थित थे, किसी एक परीक्षा केंद्र की परीक्षा रद्द हुई या फिर कोई तकनीकी कारण है? उनका कहना है कि 832 अभ्यर्थियों में एक भी उम्मीदवार का सफल नहीं होना संदेह पैदा करता है और इसकी स्पष्ट जांच होनी चाहिए.

कट-ऑफ जारी नहीं होने पर भी सवाल
अभ्यर्थियों का कहना है कि केवल 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा ही नहीं, बल्कि आयोग द्वारा हाल के महीनों में जारी कई परीक्षाओं के परिणामों के साथ भी कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
इनमें प्रमुख रूप से
- सिविल जज जूनियर डिवीजन पीटी परीक्षा (5 जून 2026)
- संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग-2023 पीटी परीक्षा (24 जून 2026)
- संयुक्त सिविल सेवा नियमित परीक्षा-2025 (2 जुलाई 2026)
- फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर मुख्य (लिखित) परीक्षा (3 जुलाई 2026)
के परिणाम शामिल हैं. अभ्यर्थियों ने स्थानांतरित परीक्षा नियंत्रक द्वारा परिणाम जारी किए जाने पर भी आपत्ति जताई है.
बैकलॉग परीक्षा का संशोधित मॉडल उत्तर भी जारी
इस बीच JPSC ने सिविल सेवा बैकलॉग-2025 प्रारंभिक परीक्षा का संशोधित मॉडल उत्तर भी जारी किया है. 17 मई 2026 को आयोजित इस परीक्षा के बाद आयोग ने 11 जून को प्रारंभिक उत्तर प्रकाशित कर 12 से 15 जून तक अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी थीं. आपत्तियों की समीक्षा के बाद आयोग ने संशोधित उत्तर जारी करते हुए प्रथम प्रश्नपत्र के एक प्रश्न के सभी विकल्प सही माने, जबकि दूसरे प्रश्नपत्र के चार प्रश्न रद्द (ड्रॉप) कर दिए.
यह परीक्षा कुल 45 पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिनमें-
- 36 पद उपसमाहर्ता,
- 2 पद सहायक निबंधक (कृषि),
- 7 पद झारखंड शिक्षा सेवा
के शामिल हैं. परीक्षा में लगभग 30 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे और रांची में 64 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे.
दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा बना सबसे बड़ा घोटाला
JPSC के इतिहास का सबसे चर्चित विवाद 2007-08 की दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा माना जाता है. परिणाम घोषित होने के बाद मेरिट सूची, मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे. मामला पहले राज्य निगरानी विभाग तक पहुंचा और बाद में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर जांच CBI को सौंप दी गई. CBI ने तत्कालीन JPSC अध्यक्ष सहित कई अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ जांच की. बाद में विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल हुआ और कई आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई. यह मामला आज भी आयोग के सबसे बड़े विवादों में गिना जाता है.
6वीं संयुक्त परीक्षा पांच वर्षों तक उलझी रही
18 दिसंबर 2016 को आयोजित 6वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा भी लंबे समय तक विवादों में रही. परिणाम कई बार संशोधित हुए. आरक्षण नीति को लेकर मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा. वर्ष 2021 में हाईकोर्ट ने मेरिट सूची में खामियां पाते हुए उसे रद्द कर नई मेरिट सूची तैयार करने का निर्देश दिया. इसके बाद आयोग को संशोधित परिणाम जारी करना पड़ा.
7वीं से 10वीं संयुक्त परीक्षा में OMR विवाद
19 सितंबर 2021 को आयोजित 7वीं, 8वीं, 9वीं और 10वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के बाद OMR शीट को लेकर बड़ा विवाद सामने आया. आयोग ने स्वीकार किया कि कुछ अभ्यर्थियों की OMR शीट उपलब्ध नहीं हो सकी थी. इसके बाद परिणाम में संशोधन किया गया और कुछ अभ्यर्थियों का चयन रद्द करना पड़ा. इस मामले को लेकर अभ्यर्थियों ने रांची के मोराबादी मैदान में लंबे समय तक प्रदर्शन किया और पूरी परीक्षा की निष्पक्ष जांच की मांग की. मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा.
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11वीं, 12वीं और 13वीं संयुक्त परीक्षा में पेपर लीक के आरोप
मार्च 2024 में आयोजित संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा के दौरान जामताड़ा के एक परीक्षा केंद्र से कथित वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद पेपर लीक के आरोप लगे. अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. हालांकि आयोग ने परीक्षा प्रक्रिया जारी रखी, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए.
JET परीक्षा भी रही विवादों में
वर्ष 2026 में आयोजित JET-2024 परीक्षा के दौरान Education और Oriya विषयों के प्रश्नपत्र दो परीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुंच सके. इसके कारण उन केंद्रों की परीक्षा रद्द करनी पड़ी और आयोग को दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लेना पड़ा.
अधिकांश भर्तियां पहुंचीं हाईकोर्ट
JPSC की कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में वर्षों से लगातार याचिकाएं दायर होती रही हैं. इनमें आरक्षण नीति, मेरिट सूची, OMR मूल्यांकन, परिणाम संशोधन, उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया को चुनौती दी गई. कई मामलों में हाईकोर्ट ने आयोग से जवाब मांगा, परिणाम संशोधित करने के निर्देश दिए और कुछ मामलों में मेरिट सूची तक रद्द करनी पड़ी.
सबसे अधिक नुकसान युवाओं का
लगातार विवाद, न्यायालयी प्रक्रिया और परिणामों में देरी का सबसे बड़ा असर अभ्यर्थियों पर पड़ा है. एक-एक भर्ती पूरी होने में कई बार चार से छह वर्ष लग जाते हैं. इस दौरान हजारों उम्मीदवार आयु सीमा पार कर जाते हैं, जबकि कई युवाओं का महत्वपूर्ण समय केवल परीक्षा, परिणाम, संशोधित परिणाम और कोर्ट के फैसलों का इंतजार करते हुए बीत जाता है. इसी कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अब JPSC के बजाय अन्य राज्यों के लोक सेवा आयोगों, केंद्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं और निजी क्षेत्र की नौकरियों की ओर रुख कर रहे हैं.


