Hazaribagh: मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के सदर प्रखंड अंतर्गत सीतागढ़ा के गुड़वा मौजा में भूमि विवाद को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. सोमवार को हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल ग्रामीणों के आग्रह पर विवादित स्थल पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली. इस दौरान उन्होंने कथित प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे निष्पक्ष नहीं बताया तथा प्रशासन से न्यायसंगत कार्रवाई की मांग की.
घायल ग्रामीण से मिलकर सुनी पूरी आपबीती
सांसद ने सबसे पहले घायल कुदुस अंसारी से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना. कुदुस अंसारी ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा एक पक्ष की सूचना पर की गई कार्रवाई के दौरान उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उनका हाथ टूट गया. उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त होने की जानकारी देने के बावजूद उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया. सांसद ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने की बात कही.
ग्रामीणों ने वर्षों पुराने कब्जे और न्यायालय के आदेश का दिया हवाला
ग्रामीणों ने सांसद को बताया कि गुड़वा मौजा के खाता संख्या-2, प्लॉट संख्या-632 की कुल 294.6 एकड़ भूमि में से 24.52 एकड़ जमीन पर वर्ष 1938 से उनका दखल-कब्जा है और वे पीढ़ियों से खेती-बारी करते आ रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार इस भूमि को लेकर पूर्व में टाइटल सूट दायर हुआ था, जिसमें वर्ष 1982 में नूर मोहम्मद, जीवनलाल महतो सहित अन्य ग्रामीणों के पक्ष में डिक्री पारित हुई थी. इसके बावजूद अब उस भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है.
सार्वजनिक रास्ते पर गेट लगाने का भी आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित टीचर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की ओर से सीतागढ़ा जाने वाले सार्वजनिक मार्ग के दोनों ओर गेट लगाकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया है. उनका कहना था कि इस मार्ग से प्रतिदिन 8 से 10 गांवों के लोग आवागमन करते हैं और रास्ता बंद होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने इसे सार्वजनिक मार्ग पर अतिक्रमण बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की.
सांसद ने अंचल कार्यालय पहुंचकर सीओ से की बातचीत
घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सांसद मनीष जायसवाल सीधे सदर अंचल कार्यालय पहुंचे. यहां उन्होंने सदर अंचल अधिकारी आशुतोष कुमार से मुलाकात कर ग्रामीणों की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेज सौंपे. सांसद ने कथित एकपक्षीय प्रशासनिक कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन का दायित्व निष्पक्ष होकर न्याय करना है, न कि किसी एक पक्ष के पक्ष में खड़ा होना. उन्होंने सार्वजनिक मार्ग पर लगाए गए गेट को तत्काल हटाकर आवागमन बहाल कराने की मांग की. साथ ही चेतावनी दी कि यदि किसी दबाव में आकर किसी विशेष पक्ष को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया तो जनता इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी.

‘न्याय मिलने तक ग्रामीणों के साथ रहूंगा’ : सांसद
सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि वे पीड़ित ग्रामीणों के साथ मजबूती से खड़े हैं और न्याय मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा. उन्होंने प्रशासन से उपलब्ध अभिलेखों एवं न्यायालय के आदेशों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि यदि पक्षपातपूर्ण कार्रवाई जारी रही तो मामले को उच्च स्तर तक उठाया जाएगा. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी गरीब, किसान या ग्रामीण के साथ अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा. जनता के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर आवाज उठाते रहेंगे.
बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि सत्येंद्र नारायण सिंह, किशोरी राणा, जिला योजना सांसद प्रतिनिधि अनूप कुमार, भाजपा नेता अनिल मिश्रा, मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी, विशेषांक वर्मा, मुखिया इम्तियाज आलम सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं सैकड़ों ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित रहे.
