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‘या हुसैन’ के नारों से गूंजा लोहरदगा, मुहर्रम जुलूस में युवाओं ने दिखाए हैरतअंगेज करतब

Lohardaga: लोहरदगा शहर में मुहर्रम का जुलूस पूरी श्रद्धा, अनुशासन और पारंपरिक उत्साह के साथ निकाला गया. शहर का माहौल “या हुसैन”...

Lohardaga Muharram

Lohardaga: लोहरदगा शहर में मुहर्रम का जुलूस पूरी श्रद्धा, अनुशासन और पारंपरिक उत्साह के साथ निकाला गया. शहर का माहौल “या हुसैन” के नारों, तकरीरों और मातमी धुनों से गूंज उठा. जुलूस में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग, युवा और बच्चे शामिल हुए. सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकला यह जुलूस शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ.

युवाओं और बच्चों ने पारंपरिक अखाड़ा कला तथा विभिन्न हैरतअंगेज करतबों का किया प्रदर्शन

मुहर्रम का मुख्य जुलूस शहरी क्षेत्र स्थित बड़ी मस्जिद के पास से प्रारंभ हुआ. यहां धार्मिक कार्यक्रम के बाद जुलूस आगे बढ़ा और थाना रोड, आजाद चौक, गुदरी बाजार, शास्त्री चौक, इमली चौक तथा इस्लाम नगर होते हुए अपने निर्धारित स्थल पर जाकर संपन्न हुआ. पूरे मार्ग में लोगों ने जुलूस का स्वागत किया तथा जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए पेयजल एवं शरबत की व्यवस्था भी की गई. जुलूस में युवाओं और बच्चों ने पारंपरिक अखाड़ा कला तथा विभिन्न हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया. तलवारबाजी, लाठी, फरसा एवं अन्य पारंपरिक युद्ध कलाओं के प्रदर्शन ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया. सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों ने इन करतबों की सराहना करते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया.

निकाली गईं विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियां

मुहर्रम जुलूस के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियां भी निकाली गईं, जिनमें कर्बला की घटना और हजरत इमाम हुसैन की शहादत को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया. झांकियों को देखने के लिए पूरे शहर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों ने भी पूरे उत्साह के साथ जुलूस में भाग लिया. इस अवसर पर अंजुमन इस्लामिया की ओर से कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मान किया गया. आयोजकों ने कहा कि मुहर्रम का पर्व सत्य, इंसानियत, त्याग और न्याय के लिए किए गए संघर्ष की याद दिलाता है. हजरत इमाम हुसैन की शहादत पूरी मानवता को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है.

जुलूस के दौरान धार्मिक विद्वानों ने तकरीर करते हुए कर्बला की घटना पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारा, अमन-चैन और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की. वक्ताओं ने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि सत्य और इंसाफ के लिए संघर्ष का संदेश भी देता है.

पूरे जुलूस मार्ग पर किए गए थे सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

पूरे जुलूस मार्ग पर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई थी. प्रशासनिक अधिकारी लगातार जुलूस की निगरानी करते रहे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ.

मुहर्रम के इस अवसर पर लोहरदगा में एक बार फिर सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की सुंदर मिसाल देखने को मिली. विभिन्न समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे का सहयोग करते हुए पर्व को शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराया. पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, श्रद्धा और भाईचारे का माहौल बना रहा, जिसने शहरवासियों को एकता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया.

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