Lohardaga : विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में जिला प्रशासन, लोहरदगा की ओर से जिले में तीन दिनों तक आदिवासियत, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इस विशेष आयोजन की शुरुआत शनिवार से जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में व्यापक वृक्षारोपण अभियान के साथ होगी. जिला प्रशासन का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना, पर्यावरण के महत्व से जोड़ना और आदिवासी समाज की प्रकृति-केंद्रित जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है.

विश्व आदिवासी दिवस पर जिलेभर में महाअभियान
वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ DC संदीप कुमार मीणा द्वारा सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, नदिया परिसर में प्रथम पौधा लगाकर किया जाएगा. इस अवसर पर जिले के कई वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी, शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहेंगे. इसके साथ ही जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में एक साथ वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

जिला प्रशासन ने बताया कि विश्व आदिवासी दिवस केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और पारंपरिक जीवन मूल्यों के संरक्षण का संदेश देने का भी महत्वपूर्ण अवसर है. आदिवासी समाज का जीवन सदियों से जंगल, जल और जमीन से जुड़ा रहा है. उनकी संस्कृति में पेड़-पौधों, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों को विशेष सम्मान दिया जाता है. इसी परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस अभियान को विशेष रूप से विद्यालयों से जोड़ा गया है.

विद्यार्थियों में विकसित होगी पर्यावरण संरक्षण की व्यवहारिक समझ
अभियान के तहत विद्यार्थियों को पौधारोपण के साथ-साथ पौधों की नियमित देखभाल, संरक्षण और संवर्धन का संकल्प भी दिलाया जाएगा. प्रशासन का मानना है कि यदि विद्यार्थी पौधों की जिम्मेदारी स्वयं निभाएंगे तो उनमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यवहारिक समझ विकसित होगी और वे समाज में भी हरित वातावरण बनाने के लिए प्रेरित होंगे. जिला प्रशासन ने सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों से अभियान को सफल बनाने की अपील की है. विद्यालय परिसरों में स्थानीय जलवायु के अनुरूप छायादार, फलदार और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे, ताकि आने वाले वर्षों में विद्यालय परिसर अधिक हरित और स्वच्छ बन सकें. विद्यार्थियों को पौधों के महत्व, जैव विविधता, जल संरक्षण और स्वच्छ पर्यावरण के संबंध में भी जानकारी दी जाएगी.
संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रमों में आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न आयोजन भी किए जाएंगे. इन कार्यक्रमों के माध्यम से जिले के लोगों को आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति के प्रति उनके सम्मान और पर्यावरण संरक्षण में उनके योगदान से परिचित कराया जाएगा. DC संदीप कुमार मीणा ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है. विद्यार्थियों में बचपन से ही पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है. वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से न केवल हरियाली बढ़ेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण भी मिलेगा.
विद्यालयों में पौधों की देखभाल पर रहेगा विशेष जोर
जिला प्रशासन को उम्मीद है कि यह अभियान केवल औपचारिक पौधारोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रत्येक विद्यालय में लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाएगी. इससे विद्यालय परिसर हरित, स्वच्छ और पर्यावरण जागरूकता के प्रेरणास्रोत बनेंगे. विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर शुरू किया गया यह अभियान प्रकृति संरक्षण के सामूहिक संकल्प को मजबूत करने के साथ-साथ आदिवासी समाज के प्रकृति के साथ अटूट संबंध को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
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