Lohardaga: विश्व आदिवासी दिवस पर पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि आदिवासी संस्कृति, भाषा, परंपरा और प्रकृति आधारित जीवनशैली हमारी सबसे बड़ी पहचान है, जिसकी रक्षा करना सभी का दायित्व है.

जल, जंगल और जमीन से है आदिवासी अस्मिता
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अस्तित्व और संस्कृति का आधार हैं. आज पर्यावरण संकट के दौर में आदिवासी जीवनशैली पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है.

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने की अपील
धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि आधुनिकता के साथ अपनी मातृभाषा, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को बचाकर रखना जरूरी है. परिवार और समाज को युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए.

संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर दिया जोर
उन्होंने कहा कि संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और अन्य आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए समाज को जागरूक, शिक्षित और संगठित रहना होगा. विकास के साथ संस्कृति और प्रकृति से समझौता स्वीकार्य नहीं है.


