Click Here
Click Here
Click Here

आसनबनी में बंदोबस्ती जमीन की लूट: भूमाफिया और ‘जल-जंगल-जमीन’ के ठेकेदारों का खेल उजागर

Saraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अंचल अंतर्गत आसनबनी क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकार द्वारा भूमिहीन आदिवासी...

land mafia
कंक्रीट की दीवार से घेरी गई जमीन

Saraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अंचल अंतर्गत आसनबनी क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकार द्वारा भूमिहीन आदिवासी परिवारों को दी गई बंदोबस्ती जमीन अब खुलेआम खरीद-फरोख्त का जरिया बन गई है. जिन जमीनों का उद्देश्य गरीबों का जीवन स्तर सुधारना था, वहीं अब भूमाफियाओं और कथित आंदोलनकारियों के लिए कमाई का साधन बन गई हैं.

भूमिहीन परिवारों को दी गई थी 10-10 डिसमिल जमीन

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2001 में झारखंड राज्य गठन के बाद आसनबनी पंचायत के खाता संख्या 460, प्लॉट संख्या 2641 में आदिम जनजाति और भूमिहीन परिवारों को 10-10 डिसमिल जमीन बंदोबस्ती के तहत दी गई थी. लेकिन आज स्थिति यह है कि इन्हीं जमीनों को बेहद कम कीमत में गरीबों से खरीदकर लाखों रुपये में उद्योगपतियों को बेचा जा रहा है. सूत्र बताते हैं कि कुछ तथाकथित ‘जल-जंगल-जमीन’ के ठेकेदार और खुद को समाजसेवी बताने वाले लोग भोले-भाले आदिवासी परिवारों को झांसा देकर उनकी जमीन औने-पौने दाम में लिखवा लेते हैं. बाद में वही जमीन मोटी रकम में बेच दी जाती है. अधिकांश जमीन मालिक अशिक्षित होने के कारण उन्हें असली सौदे की जानकारी तक नहीं होती.

बंदोबस्ती जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित

आसनबनी नव प्राथमिक विद्यालय के पास का ताजा मामला इस पूरे खेल की परतें खोलता है. आरोप है कि हरजीत सिंह और हरपिंदर सिंह के साथ अंदरखाने डील कर बंदोबस्ती जमीन पर कब्जा दिला दिया गया और वहां कंक्रीट की दीवार भी खड़ी कर दी गई. सरकारी नियमों के मुताबिक, बंदोबस्ती जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है. इस संबंध में चांडिल अंचल के कर्मचारी देवाशीष ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में बंदोबस्ती जमीन की अवैध बिक्री की पुष्टि होती है, तो संबंधित बंदोबस्ती को रद्द किया जा सकता है. इसके बावजूद सवाल उठता है कि आखिर प्रशासन की नजरों से इतना बड़ा खेल कैसे छिपा रहा? क्या यह सब मिलीभगत से हो रहा है या फिर सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है? भूमिहीनों के अधिकारों पर सीधा हमला है, बल्कि ‘जल-जंगल-जमीन’ के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े का खेल कब तक?

यह भी पढ़ें: बेरमो : कोनार नदी में उड़ रही सीमेंट की खाली बोरियां, पर्यावरण का हो रहा नुकसान, संवेदक और अधिकारी मौन

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *