Newswave Desk: ग्लासगो में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने भारत के गलत नक्शे को लेकर कड़ी आपत्ति जताई. कार्यक्रम में प्रदर्शित नक्शे में भारत की भौगोलिक सीमाओं को गलत तरीके से दिखाया गया था. लवलीना ने इसे महज एक तकनीकी गलती न मानते हुए भारत की संप्रभुता और अखंडता से जुड़ा गंभीर विषय बताया.
मंच से ही उठाई आवाज, कहा—भारत के नक्शे से समझौता नहीं
लवलीना ने कार्यक्रम के दौरान आयोजकों के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का नक्शा केवल एक भौगोलिक चित्र नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता का प्रतीक है. ऐसे में किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सीमाओं को गलत तरीके से प्रदर्शित किया जाना स्वीकार्य नहीं हो सकता. उनके इस रुख की सोशल मीडिया पर भी चर्चा हुई. लोगों ने लवलीना के आत्मविश्वास और देश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की.
खेल के मैदान से आगे भी दिखा देश के प्रति जज्बा
लवलीना बोरगोहेन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और बॉक्सिंग रिंग में अपने प्रदर्शन से देश का नाम रोशन करती रही हैं. ग्लासगो की इस घटना ने उनके व्यक्तित्व का एक अलग पहलू सामने रखा. उन्होंने खेल भावना के साथ-साथ राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे पर भी दृढ़ता दिखाई. उनका संदेश साफ था कि दुनिया के किसी भी मंच पर भारत की पहचान और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े विषयों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
PM मोदी ने की लवलीना की तारीफ
लवलीना के इस कदम की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सराहना की. प्रधानमंत्री ने उनके देश के प्रति समर्पण और जागरूकता की तारीफ करते हुए कहा कि भारत के सम्मान और अखंडता से जुड़े मुद्दों पर देशवासियों का सजग रहना गर्व की बात है. प्रधानमंत्री की प्रशंसा के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया. सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने लवलीना के साहस की प्रशंसा करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज मजबूती से उठाना गर्व का विषय है.
लवलीना ने दिया स्पष्ट संदेश
ग्लासगो की घटना ने यह संदेश दिया कि देश का प्रतिनिधित्व केवल खेल मैदान में पदक जीतने तक सीमित नहीं है. जब राष्ट्रीय पहचान और सम्मान का सवाल सामने आए, तो अपनी बात मजबूती से रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. लवलीना बोरगोहेन का यह कदम उनके खेल करियर के अलावा देश के प्रति उनकी सजगता और जिम्मेदारी को भी दर्शाता है. गलत नक्शे पर उनकी आपत्ति ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में किसी भी देश की भौगोलिक और राष्ट्रीय पहचान को प्रस्तुत करते समय कितनी सावधानी बरती जानी चाहिए.
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