रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों और पेंशन देनदारियों को लंबी अवधि तक सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है. सरकार ने अपनी पेंशन मोचन निधि का विलय अब झारखंड बजट स्थिरीकरण कोष में करने का निर्णय लिया है. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पुरानी पेंशन योजना की बहाली के बाद भविष्य में आने वाले भारी भरकम वित्तीय बोझ को बेहतर निवेश प्रबंधन के जरिए कम करना है.
क्यों लिया गया यह फैसला
राज्य सरकार ने 2022 में एनपीएस के बदले ओपीएस बहाल की थी. इसके बाद भविष्य की पेंशन देनदारियों के लिए पेंशन मोचन निधि बनाई गई थी. हालांकि अब तक इस निधि का पैसा केवल 364 दिनों के लिए ट्रेजरी बिल में निवेश किया जा रहा था. भारतीय रिजर्व बैंक के साथ हुई उच्च स्तरीय चर्चा और कार्यशाला में यह बात सामने आई कि पेंशन जैसे दीर्घकालिक दायित्व के लिए अल्पकालिक निवेश पर्याप्त नहीं है. आरबीआई ने सुझाव दिया कि सिंकिंग फंड की तर्ज पर एक बजट स्थिरीकरण कोष बनाया जाए, जहां लंबी अवधि के निवेश की सुविधा मिल सके.

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विलय के क्या होंगे फायदे
लंबी अवधि का निवेश: अब पेंशन फंड का पैसा केवल एक साल के लिए ब्लॉक न होकर लंबी अवधि के लिए निवेश किया जा सकेगा, जिससे बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद है.
राजस्व सुरक्षा कवच: बजट स्थिरीकरण कोष का उपयोग न केवल पेंशन के लिए, बल्कि राजस्व में अचानक कमी या अप्रत्याशित वित्तीय संकट के समय भी किया जा सकेगा.
चरणबद्ध हस्तांतरण: पुरानी निधि में पहले से निवेशित राशि को किस्तों में नए बजट स्थिरीकरण कोष में ट्रांसफर किया जाएगा.
क्या होगा असर
वित्त विभाग के इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार के पास एक ऐसा वित्तीय रिजर्व होगा जो बाजार की अस्थिरता के समय भी कर्मचारियों की पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को सुनिश्चित करेगा. कैबिनेट की मंजूरी के बाद वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है. बेहतर निवेश विकल्पों और भविष्य की देनदारियों को संतुलित करने के लिए यह विलय किया गया है, ताकि राज्य की वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों का भविष्य दोनों सुरक्षित रह सके.


