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स्कूल ड्रॉपआउट दर में बड़ी गिरावट, प्राथमिक स्तर पर 4.67% से घटकर 0.3% हुई

Newswave Desk: देश में स्कूली शिक्षा को लेकर एक बड़ी सकारात्मक तस्वीर सामने आई है. प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों...

School dropout rate drops significantly, from 4.67% to 0.3% at the primary level

Newswave Desk: देश में स्कूली शिक्षा को लेकर एक बड़ी सकारात्मक तस्वीर सामने आई है. प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है. रिपोर्ट के अनुसार, प्राथमिक स्तर की ड्रॉपआउट दर 4.67 प्रतिशत से घटकर 0.3 प्रतिशत रह गई है.

प्राथमिक शिक्षा में आया बड़ा सुधार

स्कूल छोड़ने की दर में यह गिरावट बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें विद्यालय में बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. पहले जहां प्राथमिक स्तर पर 100 विद्यार्थियों में करीब 4 से 5 विद्यार्थी पढ़ाई बीच में छोड़ देते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 1 विद्यार्थी से भी कम रह गई है.

ड्रॉपआउट दर में कितना बदलाव आया?

स्तर पहले अब: 

प्राथमिक विद्यालय 4.67% 0.3%
कमी — 4.37 प्रतिशत अंक
सापेक्ष गिरावट — लगभग 93.6%

लड़कियों की शिक्षा पर भी जोर

विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति और निरंतरता बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं. इनमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को सहायता, छात्रवृत्ति, निःशुल्क पाठ्य सामग्री, पोषण संबंधी योजनाएं और विद्यालयों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसी पहल शामिल हैं.

स्कूल छोड़ने के पीछे क्या कारण?

बच्चों के स्कूल छोड़ने के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हो सकते हैं. गरीबी, परिवार की आर्थिक स्थिति, बच्चों का घरेलू या रोजगार संबंधी कार्यों में लगना, विद्यालय की दूरी, परिवहन की समस्या और पढ़ाई में रुचि की कमी प्रमुख कारणों में शामिल रहे हैं. ड्रॉपआउट दर में कमी यह संकेत देती है कि बच्चों को विद्यालय से जोड़ने और उन्हें शिक्षा जारी रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है.

आगे की चुनौती

प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर कम होना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि बच्चे माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर तक भी अपनी पढ़ाई जारी रखें. इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित उपस्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण पर लगातार ध्यान देना जरूरी है.

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