Palamu: जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत बोडी पंचायत के मतौली गांव में मनरेगा योजना के तहत भारी भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है. ग्रामीणों और सोशल ऑडिट टीम की जांच में सामने आया है कि सरकारी धन का बंदरबांट करने के लिए नियमों को ताक पर रखकर कागजों में योजनाओं का अंबार खड़ा कर दिया गया. इस पूरे प्रकरण ने जिले में मनरेगा के क्रियान्वयन पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं.
तीन एकड़ में 28 कुएं
ग्रामीणों ने पलामू उपायुक्त को सौंपे आवेदन में आरोप लगाया है कि मतौली गांव में महज तीन एकड़ की जमीन पर 28 कुओं का निर्माण करा दिया गया है, जो तकनीकी और व्यावहारिक रूप से असंभव प्रतीत होता है. हैरानी की बात यह है कि मजदूरों को रोजगार देने वाली इस योजना में नियमों के विरुद्ध जाकर जेसीबी मशीनों से कुओं की खुदाई कराई गई. सोशल ऑडिट टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि 78 विभिन्न योजनाओं के लिए 643 मजदूरों के नाम पर मस्टर रोल तो तैयार किए गए, लेकिन धरातल पर एक भी मजदूर कार्यरत नहीं मिला.
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लाखों की हेराफेरी का आरोप
जांच रिपोर्ट में वेंडर संतोष बैठा, बीपीओ अरविंद सिंह और मुखिया मुस्तफा मियां की संलिप्तता की ओर इशारा किया गया है. आरोप है कि गाय शेड, डोभा और अन्य योजनाओं के नाम पर करीब 30 लाख रुपये का गबन किया गया है, जबकि मजदूरी के नाम पर लगभग 9 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता बरती गई है. कई योजनाएं, जो पहले ही पूरी हो चुकी थीं, उन्हें दोबारा फाइलों में जीवित दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया है.
ग्रामीणों की मांग और प्रशासन का आश्वासन
मतौली गांव के आक्रोशित ग्रामीणों ने पलामू उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर इस पूरे घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराने और वर्तमान में होने वाले भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाई है. ग्रामीणों ने स्पष्ट मांग की है कि दोषियों पर मनरेगा अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी पैसे का दुरुपयोग रुक सके. इस मामले पर पलामू उपायुक्त ने संज्ञान लेते हुए भरोसा दिलाया है कि पूरे मामले की गहनता से जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.
