Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने मेकॉन के पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक उपेन्द्र नाथ मंडल की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान सामने आए तथयों और बैंक खातों में हुए भारी-भरकम वित्तीय लेनदेन का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया. अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि याचिकाकर्ता ने टेंडर आवंटन के दौरान निर्धारित मानकों की अनदेखी कर दो निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया. जिससे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजनाएं भी प्रभावित होते हुए प्रतीत होती हैं. न्यायाधीश अनुभा रावत चौधरी की एकलपीठ ने यह आदेश CBI के आरसी केस संख्या 08(A)/2017-R में पारित किया. मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज है.
टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप
CBI के अनुसार, याचिकाकर्ता मेकॉन में वरिष्ठ प्रबंधक रहते हुए M/s Zeal India Chemicals और M/s Shiv Machine Tools के साथ आपराधिक साजिश में शामिल था. आरोप है कि उसने तकनीकी मूल्यांकन और टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात कर दोनों कंपनियों को लाभ पहुंचाया और बदले में अपने, रिश्तेदारों और परिचितों के बैंक खातों के जरिये लगभग 1.42 करोड़ रूपये की राशि प्राप्त की.

ऋण की जानकारी जांच में साबित नहीं हुई
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कुछ रकम निजी ऋण और संपत्ति के लेनदेन से संबंधित थी. वहीं CBI ने कहा कि कथित संपत्ति सौदा कभी पूरा नहीं हुआ. फिर भी 80 लाख रूपये याचिकाकर्ता की पत्नी के खाते में चले गए. एजेंसी ने यह भी बताया कि जांच में ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले, जिससे यह साबित हो कि संबंधित रकम ऋण के रूप में दी गई थी. CBI ने यह भी अदालत को बताया कि Zeal India Chemicals केके पास टेंडर की अनिवार्य तकनीकी पात्रता नहीं थी. फिर भी उसे लाभ पहुंचाया गया. साथ ही CIMFER, धनबाद की जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित परियोजनाओं में आपूर्ति किए गए उपकरणों की कीमत वास्तविक मूल्य की तुलना में अत्यधिक अधिक थी.
वित्तीय लेनदेन की स्पष्ट जानाकारी नहीं
इन सभी तथयों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता और उसके परिजनों के खातों में हुए बड़े वित्तीय लेनदेन का कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं दिया गया. साथ ही रिकॉर्ड से यह भी प्रतीत होता है कि टेंडर आवंटन में निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजनाओं से समझौता किया गया. इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट के न्यायाधीश अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने उपेन्द्र नाथ मंडल की जमानत याचिका खारिज कर दी.


