नाबालिग लापता केस: रहमलि अंसारी का नार्को टेस्ट नहीं होने पर HC ने उठाए सवाल, CID की जांच को बताया कॉपी पेस्ट

विनीत आभा उपाध्याय Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो जिले से लापता हुई एक नाबालिग का सुराग अब तक नहीं ढूंढ पाने पर...

विनीत आभा उपाध्याय

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो जिले से लापता हुई एक नाबालिग का सुराग अब तक नहीं ढूंढ पाने पर पुलिस और अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अख्तियार किया है. हाईकोर्ट ने लापता नाबालिग की मां की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अब तक की जांच में 5 बड़ी लापरवाही पकड़ी है.

अदालत ने केस डायरी और रिकॉर्ड खंगालने के बाद पुलिस अनुसंधान में कई चौंकाने वाली कमियां और ढिलाई उजागर की हैं. हाईकोर्ट ने 8 जून के अपने आदेश में कहा है कि इस मामले के अनुसंधान अधिकारी (IO) ने 21 सितंबर 2022 को अदालत से चार संदिग्धों जनता तुरी, रहमली अंसारी, रामनारायण हेम्ब्रम और गणेशलाल मिश्रा के नार्को टेस्ट की अनुमति मांगी थी. इन चारों आरोपियों ने अदालत में उपस्थित होकर स्वेच्छा से लिखित सहमति भी दी थी. लेकिन पुलिस ने इस आदेश को इसके मूल भावना में लागू नहीं किया. तीन आरोपियों का नार्को टेस्ट जनवरी 2023 में करा लिया गया था लेकिन चौथे आरोपी रहमली अंसारी को मेडिकल अनफिट बताकर उसका टेस्ट नहीं किया गया.

हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा…

हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस ने आज तक अदालत में ऐसा कोई मेडिकल सर्टिफिकेट पेश नहीं किया जो रहमली अंसारी की अयोग्यता को साबित करे. अगर वह उस समय अनफिट था तो उसके ठीक होने के बाद उसका दोबारा नार्को टेस्ट कराने का कोई प्रयास पुलिस ने नहीं किया. जबकि केस को सुलझाने के लिए वह एक महत्वपूर्ण कड़ी हो सकता था. बोकारो पुलिस ने इस संवेदनशील मामले को सालों तक ठंडे बस्ते में रखा और जब हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई तब जाकर आनन-फानन में 20 अप्रैल 2026 को जांच CID को ट्रांसफर की गई. यह ट्रांसफर घटना के साढ़े पांच साल बाद और नार्को टेस्ट के आदेश के तीन साल बाद किया गया जो पुलिसिया सुस्ती को दर्शाता है.

सुनवाई के दौरान कोर्ट में CID के इंस्पेक्टर अमरदीप और पिंड्राजोरा के थाना प्रभारी रवि कुमार उपस्थित थे. CID इंस्पेक्टर ने पहले बहाना बनाया कि केस डायरी कोर्ट के बाहर है और कुछ समय बाद उसे पेश किया. हाईकोर्ट ने जब केस डायरी का अवलोकन किया तो पाया कि CID ने केस हाथ में लेने के बाद कोई भी नया प्रयास नहीं किया है. वे केवल बोकारो पुलिस द्वारा पहले से दर्ज गवाहों के बयानों को ही अपनी डायरी में दोहरा रहे थे. इतना ही नहीं इस मामले में केस IO ने वरीय अधिकारीयों के सुपरविजन नोट की भी अनदेखी की है.

लापता नाबालिग की मां ने याचिका दायर की 

इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जसिटस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने इस मामले में चल रही है. इस संबंध में लापता नाबालिग की मां उषा झा ने याचिका दायर की है. पीड़िता 9वीं कक्षा की छात्रा थी. 16 अक्टूबर 2020 को सुबह करीब 10:45 बजे बोकारो जिले के पिंडराजोरा थाना अंतर्गत ग्राम कुरमा में ट्यूशन पढ़ने के लिए अपने घर से निकली थी. जिसके बाद दोपहर करीब 11:45 बजे ग्रामीणों ने पीड़िता के पिता रामकृष्ण झा को सूचना दी कि कुरमा जाने वाली अस्पताल रोड पर मुख्य सड़क के बीचों-बीच एक लेडीज साइकिल, चप्पल और कुछ कॉपियां-किताबें बिखरी पड़ी हैं. कॉपियों पर छात्रा का नाम सेजल उर्फ पाखी कुमारी झा लिखा हुआ था. पिता और ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर सामान की पहचान की और काफी खोजबीन की लेकिन बेटी का कोई सुराग नहीं मिला. इसके बाद पिंडराजोरा थाने में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया गया था.

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