Ranchi: झारखंड में इस मानसून सीजन में बादलों की लुकाछिपी और बारिश की बेरुखी ने राज्य के किसानों और आम जनजीवन की चिंता बढ़ा दी है. 1 जून से 11 अगस्त तक के आधिकारिक वर्षा के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं. पूरे राज्य में मानसून इस बार कमजोर साबित हुआ है, जिसके चलते सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है. आलम यह है कि राज्य के 24 जिलों में से 23 जिलों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है और केवल एक ही ऐसा जिला है, जहां सामान्य से बेहतर बारिश हुई है.
क्या कहते हैं मौसम विभाग के आंकड़े?
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि के दौरान झारखंड में कुल औसत वास्तविक वर्षा 483.5 मिलीमीटर दर्ज की गई, जबकि सामान्य रूप से 616.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी. इस प्रकार, पूरे राज्य में सामान्य के मुकाबले 22% की कमी दर्ज की गई है, जो सीधे तौर पर कमी श्रेणी के अंतर्गत आती है.
पश्चिमी सिंहभूम रहा सबसे आगे
राज्य में एकमात्र पश्चिमी सिंहभूम ऐसा जिला रहा, जहां इस मानसून सीजन में अतिरिक्त बारिश दर्ज की गई. यहां 739 मिलीमीटर वास्तविक वर्षा हुई, जो सामान्य से 21% अधिक है. वहीं धनबाद में 18%, दुमका में 17%, पूर्वी सिंहभूम में 12%, खूंटी में 9%, रांची में 9%, साहिबगंज में 10%, सरायकेला-खरसावां में 3% और सिमडेगा में 5% की कमी दर्ज की गई है.
चतरा और गढ़वा की स्थिति सबसे खराब
राज्य के कई जिले सूखे की कगार की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं. चतरा में 55%, गढ़वा में 54%, पाकुड़ में 51%, देवघर में 47%, कोडरमा में 44% और पलामू में 43% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है. वहीं बोकारो में 35% की कमी दर्ज की गई. गिरिडीह में 42% गोड्डा में 23%, गुमला में 29% और हजारीबाग में 35% की गिरावट रिकॉर्ड की गई. जामताड़ा में 26%, लातेहार में 30%, लोहरदगा में 28% और रामगढ़ में 30% की कमी दर्ज की गई है.
यह भी पढ़ें: झारखंड में मानसून फिर सक्रिय: कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट, जानें अगले कुछ दिनों का मौसम हाल
