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जामताड़ा में शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया मुहर्रम, अखाड़ों में युवाओं के करतब बने आकर्षण का केंद्र 

Jamtara: झारखंड के जामताड़ा जिले में मुहर्रम का पर्व शुक्रवार को धार्मिक आस्था, भाईचारे और शांतिपूर्ण वातावरण में मनाया गया. जिलेभर में...

Jamtara Muharram Julus
पारंपरिक युद्धकला में मंत्री डॉ. अंसारी ने लिया भाग

Jamtara: झारखंड के जामताड़ा जिले में मुहर्रम का पर्व शुक्रवार को धार्मिक आस्था, भाईचारे और शांतिपूर्ण वातावरण में मनाया गया. जिलेभर में भव्य ताजिया जुलूस निकाले गए, जिनमें हजारों लोगों ने भाग लिया. जामताड़ा शहर सहित नारायणपुर, करमाटांड़, फतेहपुर, नाला और कुंडहित प्रखंडों में पारंपरिक अखाड़ों के युवाओं ने लाठी, तलवार और भाले से युद्धकला का शानदार प्रदर्शन कर लोगों का मन मोह लिया. शहर के सुभाष चौक पर विभिन्न गांवों के ताजिए एकत्र हुए, जहां बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने अखाड़ों के हैरतअंगेज करतबों का आनंद लिया. पूरे आयोजन के दौरान जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा. उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी अखाड़ों में पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया.

मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों का किया दौरा

इस अवसर पर झारखंड सरकार के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले तथा आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर अखाड़ा प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया. उन्होंने युवाओं के लाठी-डंडा, तलवारबाजी और पारंपरिक युद्धकला के प्रदर्शन की सराहना की. मंत्री स्वयं भी अखाड़े में उतरे और पारंपरिक अंदाज में लाठी एवं तलवार चलाकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया. उनके प्रदर्शन पर लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया.

शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी आगे बढ़ें युवा- मंत्री डॉ. अंसारी

मंत्री डॉ. अंसारी ने कहा कि अखाड़ों में युवाओं का जोश, अनुशासन और पारंपरिक कला के प्रति समर्पण प्रेरणादायक है. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया, कि जिस लगन और मेहनत से वे अखाड़ों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं, उसी समर्पण के साथ शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी आगे बढ़ें. उन्होंने कहा कि शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक रूप से सशक्त और शिक्षित होना भी आवश्यक है. शिक्षा, अनुशासन और सकारात्मक सोच ही व्यक्ति को समाज, राज्य और देश के विकास में सार्थक योगदान देने योग्य बनाती है.

मुहर्रम का पर्व पूरे जिले में शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ. लोगों ने अमन, शांति, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की दुआ मांगी. यह आयोजन एक बार फिर जामताड़ा की गंगा-जमुनी तहजीब, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सद्भाव की मिसाल बनकर सामने आया.

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