हजारीबाग में नगर निगम की मशीन बनी शोपीस, करोड़ों की “सफाई योजनाओं” के बीच झील पर ‘हरे कब्जे’ का साम्राज्य

Hazaribagh: हजारीबाग की पहचान मानी जाने वाली ऐतिहासिक झील आज बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जिसे देखकर शहरवासी शर्मिंदगी...

Hazaribagh:  हजारीबाग की पहचान मानी जाने वाली ऐतिहासिक झील आज बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जिसे देखकर शहरवासी शर्मिंदगी महसूस कर रहे है.  कभी पर्यटकों और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र रही यह झील अब पूरी तरह जलकुंभियों की मोटी चादर से ढंक चुकी है. दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह कोई हरा मैदान हो, न कि शहर की जीवनदायिनी झील. सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की कार्यशैली पर खड़ा हो रहा है. लाखों रुपये खर्च कर खरीदी गई जलकुंभी हटाने वाली मशीन आखिर कहां है ? यदि मशीन मौजूद है तो उसका उपयोग क्यों नहीं हो रहा? और यदि मशीन खराब है तो उसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? इन सवालों का जवाब देने वाला कोई नहीं है.

मशीन खरीदकर भूल गया निगम

झील की सफाई के लिए नगर निगम द्वारा जलकुंभी हटाने के लिए मशीन खरीदी गई थी. दावा किया गया था कि इससे नियमित सफाई होगी और झील की सुंदरता बरकरार रहेगी. लेकिन आज की तस्वीर कुछ और बया करती है. निगम के अधिकारी केवल कागजी दावों तक सीमित नजर आ रहे है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई अभियान सिर्फ फोटो खिंचवाने और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित रह गया है. धरातल पर न मशीन दिखती है और न सफाई कार्य.

पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार जलकुंभी तेजी से फैलने वाला जलीय खरपतवार है, जो पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम कर देता है. इससे जलीय जीवों का जीवन प्रभावित होता है और पानी सड़ने लगता है. लंबे समय तक यही स्थिति रही तो झील का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है. जलकुंभियों के कारण मच्छरों का प्रकोप, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. इसके अलावा झील से उठने वाली दुर्गंध आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है.

पर्यटन और शहर की छवि पर असर

हजारीबाग झील सिर्फ जलस्रोत नहीं, बल्कि शहर की पहचान है.  यहां सुबह-शाम टहलने आने वाले लोग, पर्यटक और युवा अब झील की बदहाल स्थिति देखकर मायूस लौट रहे है. शहर के बीचोंबीच स्थित यह झील आज निगम की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण बन गई है.

जलकुंभी हटाने वाली मशीन का उपयोग क्यों नहीं हो रहा?,मशीन चालू हालत में है या बंद पड़ी है?, झील की नियमित सफाई के लिए क्या कार्ययोजना है?, करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद झील की हालत बदतर क्यों?, क्या निगम केवल बैठकों और प्रेस नोट तक सीमित है?

शहरवासियों में नाराजगी

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई नहीं हुई तो हजारीबाग झील धीरे-धीरे दलदल में तब्दील हो जाएगी. लोगों ने निगम प्रशासन से तत्काल विशेष अभियान चलाकर जलकुंभियों को हटाने और झील को बचाने की मांग की है. शहर की पहचान बचानी है तो अब दिखावे नहीं, जमीन पर काम करना होगा. वरना आने वाले समय में हजारीबाग झील सिर्फ तस्वीरों और इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह जाएगी.

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