Hazaribagh: हजारीबाग की राजनीति इन दिनों विकास से ज्यादा वर्चस्व, सम्मान और राजनीतिक ताकत की लड़ाई को लेकर चर्चा में है. एक ओर मनीष जायसवाल हैं, तो दूसरी ओर सदर विधायक प्रदीप प्रसाद. दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुकी है.

हाल ही में वेल्स क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद यह सियासी संघर्ष खुलकर सामने आ गया. मंच, सम्मान और राजनीतिक प्रभाव को लेकर शुरू हुआ विवाद अब आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है. विधायक प्रदीप प्रसाद ने खुद को अपमानित किए जाने का आरोप लगाया, जबकि सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि “विरोध करने के कई तरीके होते हैं, क्रिकेट ग्राउंड उचित मंच नहीं है.”
वेल्स क्रिकेट ग्राउंड बना सियासी रणक्षेत्र
सूत्रों के अनुसार, वेल्स क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विधायक प्रदीप प्रसाद ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी. उनका आरोप था कि उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया और सम्मान कम करने की कोशिश की गई. कार्यक्रम के दौरान विधायक ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि यदि उनका अपमान किया जाएगा तो वे विरोध करेंगे और स्टेडियम भी बंद करा देंगे. इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में यह मामला चर्चा का विषय बन गया.
सांसद का पलटवार, बढ़ी राजनीतिक तल्खी
विधायक के बयान के बाद सांसद मनीष जायसवाल ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि विरोध करने के कई तरीके होते हैं और सार्वजनिक मंचों की गरिमा बनाए रखनी चाहिए. सांसद के इस बयान को विधायक पर अप्रत्यक्ष हमला माना गया. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से संगठन और जनाधार को लेकर प्रतिस्पर्धा चल रही थी, जो अब खुलकर सामने आ गई है.
विधायक का बड़ा आरोप, राजनीतिक हलचल तेज
विवाद उस समय और बढ़ गया जब विधायक प्रदीप प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सांसद पर गंभीर आरोप लगाए. विधायक ने आरोप लगाया कि सांसद द्वारा एनटीपीसी और त्रिवेणी सैनिक जैसी कंपनियों से भयादोहन कर निजी स्वार्थ के लिए पैसे वसूले जा रहे हैं. हालांकि इन आरोपों पर सांसद पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. समर्थकों का कहना है कि यह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बयानबाजी है.
भाजपा के भीतर बढ़ी बेचैनी
दोनों नेताओं की बयानबाजी के बाद भाजपा कार्यकर्ता भी दो खेमों में बंटते नजर आ रहे हैं. एक पक्ष सांसद के समर्थन में दिखाई दे रहा है, जबकि दूसरा विधायक के सम्मान की लड़ाई को सही ठहरा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और तेज हो सकता है. जिले में होने वाले कई कार्यक्रम अब शक्ति प्रदर्शन का मंच बनते जा रहे हैं.
जनता बोली- हमें चाहिए सड़क, बिजली और पानी
इस पूरे विवाद के बीच आम जनता बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठा रही है. भीषण गर्मी में जिले के कई इलाकों में बिजली संकट, पेयजल समस्या, खराब सड़कें और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली जैसे मुद्दे अब भी बने हुए हैं. लोगों का कहना है कि नेताओं की लड़ाई सम्मान और वर्चस्व की हो सकती है, लेकिन आम जनता को सड़क, बिजली, पानी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं चाहिए.
“सम्मान की राजनीति” या “शक्ति परीक्षण”?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह विवाद केवल मंचीय सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आने वाले चुनावों से पहले शक्ति परीक्षण के तौर पर भी देखा जा रहा है. एक ओर सांसद मनीष जायसवाल अपने संगठनात्मक प्रभाव और संसदीय पकड़ के सहारे मजबूत स्थिति में नजर आते हैं, वहीं विधायक प्रदीप प्रसाद लगातार आक्रामक रुख अपनाकर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं करेंगे.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह विवाद यहीं थमेगा या आने वाले दिनों में भाजपा के भीतर खुली राजनीतिक लड़ाई का रूप ले लेगा.
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