New Delhi: महंगी दवाओं की मार झेल रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 39 जरूरी दवाओं और उनके अलग-अलग फॉर्मूलेशन की खुदरा कीमतें निर्धारित कर दी हैं. अब कंपनियां इन दवाओं को तय कीमत से ज्यादा एमआरपी पर नहीं बेच पाएंगी.NPPA ने यह फैसला औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (DPCO-2013) के तहत लिया है. हालांकि, जिन दवाओं पर जीएसटी लागू होगा, उसमें तय कीमत के ऊपर टैक्स की राशि अलग से जोड़ी जा सकती है.
किन बीमारियों की दवाएं हुईं सस्ती
इस नई कीमत सूची में कई गंभीर और आम बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को शामिल किया गया है. इनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट डिजीज, संक्रमण, आंखों की समस्या, दर्द, कैंसर, एचआईवी, मिर्गी और विटामिन डी की कमी से जुड़ी दवाएं शामिल हैं. NPPA ने हर दवा की कीमत उसकी यूनिट के हिसाब से तय की है. यानी किसी दवा की कीमत प्रति टैबलेट, कैप्सूल, मिलीलीटर या इंजेक्शन वायल के आधार पर निर्धारित की गई है.

इन प्रमुख दवाओं की कीमत हुई तय
एम्लोडिपिन + टेल्मिसार्टन + मेटोप्रोलोल टैबलेट की कीमत 12.03 रुपये प्रति गोली तय की गई है. एमोक्सिसिलिन + क्लैवुलानेट डिस्पर्सिबल टैबलेट अब 27.31 रुपये प्रति गोली मिलेगी. एस्पिरिन + एटोरवास्टेटिन कैप्सूल की कीमत 3.67 रुपये प्रति कैप्सूल तय की गई है. डापाग्लिफ्लोजिन + टेल्मिसार्टन टैबलेट की कीमत 19.30 रुपये प्रति गोली रखी गई है. विटामिन D3 ओरल सॉल्यूशन की कीमत 15.88 रुपये प्रति मिलीलीटर तय हुई है.
हार्ट अटैक और स्ट्रोक के इलाज में इस्तेमाल होने वाले टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन की कीमत 60,238.27 रुपये प्रति वायल निर्धारित की गई है. ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की कई दवाएं सूची में शामिल हैं . नई सूची में ब्लड प्रेशर की दवाओं में एम्लोडिपिन, टेल्मिसार्टन, बिसोप्रोलोल, नेबिवोलोल और ओल्मेसार्टन के कई कॉम्बिनेशन शामिल हैं. वहीं डायबिटीज के मरीजों के लिए डापाग्लिफ्लोजिन, एम्पाग्लिफ्लोजिन, सिटाग्लिप्टिन, मेटफॉर्मिन और ग्लिमेपिराइड जैसी दवाओं के संयोजन को भी कीमत नियंत्रण के दायरे में लाया गया है.इसके अलावा एंटीबायोटिक, हृदय रोगों में उपयोग होने वाली दवाएं, आंखों की दवाएं, कैंसर की दवा इमैटिनिब, एचआईवी उपचार की दवा और अन्य जरूरी मेडिसिन भी इस सूची में शामिल हैं.
दवा कंपनियों पर सख्ती
NPPA ने कंपनियों को साफ निर्देश दिया है कि तय कीमत से ज्यादा राशि मरीजों से नहीं ली जा सकती. अगर कोई कंपनी नियमों का उल्लंघन करती है तो उससे अतिरिक्त वसूली गई रकम ब्याज सहित वापस वसूली जा सकती है. वहीं, अगर अगले 12 महीनों में कोई दूसरी कंपनी इसी फॉर्मूलेशन की दवा बाजार में लाती है, तो उसे भी तय कीमत या उससे कम दर पर ही दवा बेचनी होगी. कंपनियों को अपनी नई कीमतों और जरूरी जानकारियों को निर्धारित समय के अंदर NPPA पोर्टल पर जमा करना होगा. इस फैसले से उम्मीद है कि मरीजों को जरूरी दवाएं कम कीमत पर उपलब्ध होंगी और दवा बाजार में कीमतों को लेकर नियंत्रण और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगे.
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